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13 करोड़ से बना राजकीय पालिटेक्निक कालेज, 9 साल में ही उजाड़ हो गया

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। श्यामपुर खदरी स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान राजनीतिक खींचतान का शिकार हो गया था। 13 करोड़ की लागत से कांग्रेस की सरकार में 2006 के दौरान संस्थान बनना शुरू हुआ था तब तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री हीरा सिंह बिष्ट थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2009 में संस्थान की बिल्डिंग हैंडओवर की गई। वर्ष 2015 में बतौर पूर्व कैबिनेट मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस परिसर में आए और करीब 150 पौधे रोपने के अभियान की अगुवाई की।
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वर्तमान में न तो त्रिवेंद्र सिंह रावत बतौर मुख्यमंत्री और न ही बतौर सांसद रमेश पोखरियाल निशंक इस संस्थान के पतन होते स्वरूप को रोकने की जहमत उठा पा रहे हैं। अब हालत ये है कि 12 एकड़ में फैले इस कॉलेज में सिर्फ एक ट्रेड की पढ़ाई हो रही है। कुल 154 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए सिर्फ दो लेक्चरर और तीन वर्कशाप इंस्ट्रक्टर उपलब्ध हैं। एचओडी कोई नहीं है। स्टाफ से लेकर छात्रों के लिए आवासीय व्यवस्था है। परिसर में कुल 17 भवन हैं, लेकिन आफिस और कुछ क्लास रूम को छोड़कर किसी बिल्डिंग का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। आवासीय भवनों में तो झाड़ियां उग आई हैं। सुरक्षागार्ड न होने के कारण परिसर मवेशियों का चारागाह हो गया है।

पीएमओ तक हुई मदद की गुहार, नतीजा सिफर
वर्तमान में यहां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का ट्रेड संचालित हो रहा है। शिक्षकों के अभाव में अन्य ट्रेड में पढ़ाई की नौबत ही नहीं आ पाई। एक के बाद एक शिक्षक या तो रिटायर हो गए या फिर अन्यत्र अटैच होते चले गए। हालात यह हैं कि फिजिक्स, मैथ और इंगलिश पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है। संस्थान की ओर से पर्यावरण संरक्षक बनाए गए विनोद जुगलान का कहना है कि स्टाफ और फैकल्टी की पूर्ति के लिए पीएमओ तक पत्र लिखा गया। हाल ही में यहां संविदा पर तैनात सुरक्षा गार्ड भी शासन ने हटवा दिए हैं। कई बार पत्राचार किया गया कि परिसर के चारों ओर चारदीवारी बनवा दी जाए, ताकि मवेशियों और अराजक तत्वों से संस्थान की सुरक्षा हो सके। दु:खद ये है कि संवेदनशील मुद्दे पर भी कोई सुनवाई नहीं है।
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संस्थान में मजदूरी करके पढ़ाई कर रहे बच्चे
खदरी स्थित राजकीय पालिटेक्निक में कई बच्चे ऐसे हैं जो खुद राजमिस्त्री से लेकर बैंड ग्रुप में काम करके अपनी फीस भर रहे हैं। ये बच्चे इस उम्मीद में यहां आए थे कि तकनीकी पढ़ाई करके जीवन की बदहाली से छुटकारा पा जाएंगे। ऐसे हालातों में बच्चों को अपना उज्ज्वल भविष्य नजर नहीं आ रहा। लगातार शिक्षकों का अभाव बढ़ रहा है। ऐसे में संस्थान के भरोसे काबिल बनना तो दूर डिग्री मिलना ही मुश्किल है। फिलहाल मजबूरन ये बच्चे कड़ी मेहनत के साथ ही ट्यूशन की फीस भी भर रहे हैं।

कोट्स
हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की है। इसके अलावा सुरक्षा गार्ड तैनात न होने के कारण संस्थान के संसाधन भी आशंकाओं से घिरे हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती न करें तो चलेगा, लेकिन सुरक्षा और शिक्षण के साधन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। इस संदर्भ में कम से कम चार बार निदेशालय को पत्र लिखा जा चुका है। संस्थान की कई बिल्डिंगें अनुपयोगी पड़ी हैं। इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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सुनील कुमार, प्रिंसिपल, राजकीय पालिटेक्निक कालेज, खदरी
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