इंदिरानगर, प्रगति विहार और नेहरू ग्राम में पेयजल संकट गहरा गया है। बाईपास मार्ग स्थित ट्यूबवेल की मोटर जलने से 12 हजार की आबादी बिना पानी के बेहाल है। अधिकारियों की अनदेखी से नाराज स्थानीय लोगों में अब विभाग के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है।
रविवार सुबह बाईपास मार्ग पर बने अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के तहत ट्यूबवेल की मोटर फुंक गई थी। मोटर फुंकने से लोगों के घरों में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। स्थानीय लोगों ने जल संस्थान (विश्व बैंक परियोजना) के अधिकारियों को फोन कर जानकारी दी।
रविवार होने के कारण विभागीय अधिकारियों ने किसी प्रकार की सहायता करने से हाथ खड़े कर दिए। सोमवार को जल संस्थान की ओर से ट्यूबवेल की मोटर बदली गई, लेकिन यह मोटर लोड नहीं उठा पायी। इससे ओवरहैड टैंक भी पूरा नहीं भर पाया। जिससे लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पाया।
उसके बाद स्थानीय लोगाें ने विभागीय अधिकारियों को दोबारा से सूचना देकर घरों में पानी का प्रेशर न आने की जानकारी दी। तब जल संस्थान ने मोटर बदलने का काम शुरू किया। मंगलवार रात तक घराें में पेयजल आपूर्ति नहीं हो पायी। प्रगति विहार की पार्षद सरोजनी थपलियाल, पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट ने बताया कि जल संस्थान को एक मोटर रिजर्व में रखनी चाहिए ताकि मोटर फुंकने पर तुरंत बदला जा सके।
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कोट
- तीन दिन से क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति ठप है। घर में पेयजल आपूर्ति करने के लिए हैंडपंप से पानी लेकर आना पड़ रहा है। रविवार के दिन अधिकारियों को फोन किया, अवकाश होने के कारण किसी ने फोन नहीं उठाया। विभाग की ओर से हमारी गली में टैंकर नहीं भेजा गया। - आयुष पाल, स्थानीय निवासी
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जल संस्थान क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए गंभीर नहीं है। तीन दिन से लोग पेयजल के लिए भटकते रहे। जल संस्थान की ओर से जो मोटर लगाई जाती हैं, उसमें कुछ न कुछ फाल्ट आ जाता है। विभाग को एक मोटर रिजर्व में रखनी चाहिए। अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी चाहिए। - ललित धीमान, स्थानीय निवासी
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- जल संस्थान (विश्व बैंक परियोजना) ठेकेदारों के भरोसे ही पेयजल आपूर्ति कर रहा है। अधिकारी कभी मोटर, ट्यूबवेल का निरीक्षण करने नहीं आते। रविवार को सुबह मोटर खराब हो गई थी। उसके बाद से हैंडपंप और टीएचडीसी के स्टैंड पोस्ट से सिर पर पानी ढोना पड़ा। - नरेश शर्मा, स्थानीय निवासी
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कोट-
सोमवार को ट्यूबवेल की मोटर बदल दी गई थी। मोटर बदलने के बाद भी पेयजल आपूर्ति नहीं हुई को अधीनस्थों से जानकारी जुटाई जाएगी। जल्द ही पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी। - राजेश निरवाल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान (विश्व बैंक परियोजना) देहरादून