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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए युवाओं ने बनाई पर्पल क्यूब

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पर्पल क्यूब - फोटो : AMAR UJALA
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संवाद न्यूज एजेंसी पिथौरागढ़। हरेला सोसाइटी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पर्पल क्यूब बनाई है। इसकी मदद से किसी भी निर्जीव चीज को सेनेटाइज किया जा सकता है। इस पर्पल क्यूब का इस्तेमाल अस्पताल, कार्यालय, घर सहित कई अन्य स्थानों पर किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं जैसे एंबुलेंस, हॉस्पिटल के कमरो, वेंटिलेटर रूम्स, हॉस्पिटल स्टाफ रूम्स आदि स्थानों को सेनीटाइज करने में किया जा सकता है। हरेला सोसाइटी के मन्नू डफाली ने बताया कि पर्पल क्यूब यूवी विकरण और इसके किटाणुओं पर होने वाले प्रभाव के नियम पर काम करती है। सौर विकिरण के स्पेक्ट्रम का एक भाग यूवी कहलाता है, जिसे पराबैंगनी किरणें भी कहते हैं। पराबैंगनी किरणों का भी यूवीसी भाग जब किसी विषाणु के संपर्क में आता है, तो यह उसके डीएनए, आरएनए को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वह अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते और इस तरह से यूवी लाइट्स बैक्टीरिया, वायरस, मोल्ड्स आदि को खत्म कर देती हैं। उन्होंने बताया कि पहले टीम ने अलग-अलग रसायनों जैसे हैड्रोजन-पराक्साइड, ब्लीच, सोडियम हाइपोक्लोराइट, इथेनॉल आदि से चीजों को सेनीटाइज करने कोशिश की, लेकिन लॉकडाउन के चलते इनमें से अधिकांश रसायन या तो उपलब्ध नहीं हो पाए। इनके प्रयोग करने के तरीकों और प्रभावों में संशय की स्थिति बनी रही। इसके बाद युवाओं ने कुछ पुरानी आरओ मशीनों और यूवी ट्यूबस से ये मशीन बना डाली, जिससे वो अब अपने संसाधनों और वितरण सामग्री को किटाणु विहीन कर रहे हैं। -------इनसेट------ इग्लैंड में इस तकनीक का प्रयोग कर कंपनिया दे रही हैं अस्पतालों में सेवा -- पिथौरागढ़। हरेला सोसाइटी के मन्नू डफाली ने बताया कि हरेला टीम ने अपनी शुरुआती शोध में पाया कि इंग्लैंड में इसी तकनीक पर आधारित कुछ कंपनियां वहां के हॉस्पिटलों को अपनी सेवाएं दे रही हैं। चीन में भी बसों को यूवी विकरण से जगमगाती टनल से गुजारा जाता है। उन्होंने बताया कि वहां रोबोट चीजों जैसे करेंसी नोटों आदि को यूवी लैंप से ही कीटाणु विहीन कर रहे हैं। -----इनसेट---- अस्पतालों को किया जा सकता है विषाणु विहिन --पिथौरागढ़। अस्पतालों के कमरों को इस तकनीक के माध्यम से विषाणुविहीन किया जा सकता है। प्रक्रिया के दौरान कमरे में हवा का सरकुलेशन बना रहना चाहिए, जिससे विषाणु यूवी लाइट्स के संपर्क में आए और मारे जाएं। ----इनसेट---- सिर्फ निर्जीव चीजें होंगी सेनेटाइज -पिथौरागढ़। इस तकनीक का प्रयोग सिर्फ निर्जीव वस्तुओं को किटाणुविहीन करने के लिए किया जा सकता है। हाथों को इससे साफ करने की कोशिश की जाए तो यह बेहद खतरनाक होगा। इससे कैंसर होने का खतरा है। साथ ही नंगी आंखों से इन किरणों को देखने से आंखें खराब भी हो सकती हैं।
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