आईटीबीपी के महानिरीक्षक पुनीत रस्तोगी ने बृहस्पतिवार को सीमांत के दारमा और व्यांस घाटी की अग्रिम चौकियों का भ्रमण कर वहां तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाया। कहा कि विषम हालातों में भी जवान सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। उनको बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी और किसी प्रकार की कठिनाई होने पर जवान सीधे उनसे संपर्क कर सकता है।
नागलिंग, सेला, दुग्तू, गालागाड़ आदि स्थानों पर स्थित अग्रिम चौकियों के निरीक्षण पर पहुंचे आईजी रस्तोगी ने सीमांत क्षेत्रों में जवानों के जीवन शैली और उनको मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की जानकारी हासिल की। कहा कि आईटीबीपी के जवान अतिदुर्गम और विपरीत हालातों में भी पूरी तत्परता से अपनी सर्वोच्च सेवाएं दे रहे हैं। साथ ही भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने स्थानीय जनता के साथ भाईचारा और सौहार्द का व्यवहार अपनाकर आम जनता को सुरक्षा को लेकर आश्वस्त करने का कार्य किया है।
बाद में धारचूला टीआरसी में आयोजित सिविक एक्शन कैंप में आईटीबीपी से सेवानिवृत्त जवानों की समस्याओं को सुना। जवानों ने मांग की कि आईटीबीपी के जवानों को काठगोदाम, डीडीहाट, मिर्थी, लोहाघाट आदि स्थानों पर स्थित गेस्ट हाउस में रहने की व्यवस्था मिलनी चाहिए। पूर्व सैनिक एवं भारत चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने कहा कि आईटीबीपी द्वारा नाभीढांग, कालापानी, छियालेख आदि स्थानों पर चेकिंग के दौरान स्थानीय लोगों को ग्राम प्रधान के प्रमाण पत्र एवं वोटर आईडी से ही आवाजाही की सुविधा दी जानी चाहिए। बाद में सीमांत के सीपू, मार्छा, तिदांग, गो और ढाकर गांव की महिलाओं को सिलाई मशीन बांटी।
आईटीबीपी लोहाघाट के कमांडेंट आनंद सिंह यर्सो ने कहा कि जवानों एवं पूर्व सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल के लिए विभाग प्रति वर्ष विशेष शिविर का आयोजन का प्रयास करता है तथा सीमांत के लोगों के कल्याण के भी कार्यक्रम आयोजित करते रहता है। इस दौरान आईटीबीपी मिर्थी के कमांडेंट महेंद्र प्रताप, डा. रोहनी हमपॉल, डा. अंबरीश कुमार, एएसआई दीपक गुंज्याल, पूर्व डिप्टी कमांडेंट लाखन खैर, गोपाल गर्ब्याल, गोविंद कुटियाल, जोगा सिंह पिंगल आदि उपस्थित थे।