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महाकाली मंदिर में श्रद्धालुओं ने लिया मां का आशीर्वाद

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गंगोलीहाट मंदिर में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट/पिथौरागढ़। शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर महाकाली मंदिर गंगोलीहाट में हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सुबह से श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर पुरोहित पंकज पंत, दीप पंत आदि पंडितों ने विधि विधान से पूजा-अर्चना कराई। मंदिर पुजारी रावल उपजाति के लोगों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया। सिमलकोट गांव के मेहता उप जाति के लोगों ने मंदिर में रात में विशेष पूजा की।
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मान्यता के अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व महाकाली मेहता उपजाति के लोगों की बलि लेती थी। आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने महाकाली का शक्तिपीठ स्थापित किया। इस दौरान गंगोलीहाट बाजार में मेला लगा। मेले में प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश के कई व्यापारी अपने उत्पाद बेचने के लिए पहुंचे थे। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में फसल और घास कटान के कारण मेले में भीड़ कम रही। मेले में शांति व्यवस्था के लिए थानाध्यक्ष मदन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।
पिथौरागढ़ नगर में अष्टमी पर मंदिरों में विधि विधान से श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। नगर के भगवती मंदिर पितरौटा, मां उल्का देवी मंदिर, मां भगवती मंदिर पौंण, मां कौशल्या देवी हुड़ेती, गुरना माता मंदिर, चंडिका धूरा, ध्वज मंदिर कनालीछीना आदि में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। घरों में लोगों ने कन्या पूजन कर कन्या रूपी नौ देवियों की आराधना कर पूजा की।
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पुराना बाजार मंदिर के पुजारी विनोद पांडेय ने बताया कि सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दौरान कई गुरना मंदिर और गांधी चौक समेत कई स्थानों में भंडारे का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने कन्यापूजन कर लिया मां का आशीर्वाद
लोहाघाट (चंपावत)। शारदीय नवरात्र की अष्टमी के दिन नगर-ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने कन्या पूजन कर मां का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने मां के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई घरों में व्रत के उद्यापन पर कन्या पूजन किया गया। पूजन के लिए लोग कन्याओं को ढूंढने में जुटे रहे। श्रद्धालुओं ने घर में कन्याओं का तिलक कर भोजन ग्रहण करवाने के बाद चुनरी, उपहार, वस्त्र भेंट किए।
श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को दक्षिणा दी। मंदिरों में भी अनुष्ठानों की पूर्णाहुति हुई। अष्टमी की पूजा के लिए मां झुमाधुरी देवी मंदिर, लड़ीधुरा देवी मंदिर, मां वाराही देवी मंदिर, ऋषेश्वर महादेव मंदिर, देवीधार, आदित्य महादेव मंदिर, कड़ाई देवी मंदिर, गलचौड़ा बाबा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
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