पिथौरागढ़ में मायूस बैठे नेपाल के मजदूर
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दिनभर सामान ढोकर एवं मेहनत-मजदूरी कर कमाए गए पैसों से जिन घरों में शाम का चूल्हा जलता है वह गंभीर परेशानी में आ गए हैं। इनमें नेपाल और बिहार के मजदूरों की संख्या ज्यादा है। इस समय उनको काम नहीं मिल रहा है और जिनके पास पहले से 1000, 500 के नोट थे, वह बदल नहीं पाए हैं। नेपाल के बाजुरा जिला निवासी नरेंद्र बोरा ने बताया कि उसके पास 500 के ही नोट हैं, लेकिन वह प्रचलन से बाहर हो गए हैं। ऐसे में शाम को घर का चूल्हा जला पाना कठिन हो गया है।
नेपाल के मजदूरों ने बताया कि नौ नवंबर से काम बहुत कम मिल रहा है। ट्रांसपोर्टरों के यहां सामान कम आ रहा है। ग्रामीण बाजारों को सामान की सप्लाई नहीं हो पा रही है। यह लोग गाड़ियों में सामान लोड, अनलोड से कमाई कर लेते थे। इस समय इक्का-दुक्का काम ही मिल रहा है। मकानों के निर्माण समेत अन्य काम प्रभावित होने से भी मजदूर खाली हाथ हो गए हैं। बैंकों के अधिकारी बिना आधारकार्ड के रुपए नहीं बदल रहे हैं। कई मजदूरों ने बताया कि काम नहीं मिला तो ज्यादा समय तक यहां रह पाना संभव नहीं होगा।
पहले भी पैसा नहीं मिला, अब भी नहीं मिल रहा
ठेकेदार संघ के जिलाध्यक्ष तारा चंद का कहना है कि सरकारी ठेकेदारों को सरकार ने पहले भी पैसा नहीं दिया था। अब भी उनको पैसा नहीं मिल पा रहा है। वह कहते हैं कि मजदूरों के भुगतान की व्यवस्था पहले भी उधार में की जा रही थी अब भी उधार के पैसे लेकर काम चलाया जा रहा है। निर्माण कार्य में लगाए गए मजदूरों से कहा गया है कि कुछ दिन तक भुगतान के लिए इंतजार करें। हां मजदूरों के लिए राशन की व्यवस्था उधार में की जा रही है।