पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में नशे के बढ़ते प्रचलन ने पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना शुरू कर दिया है। घर-घर बढ़ती कलह और घरेलू हिंसा से त्रस्त अब महिलाएं एकजुट होकर शराब के विरोध में उतर आई हैं। उनका कहना है कि उन्हें शराब की दुकानें नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए।
जिले में वर्तमान में 41 सरकारी शराब की दुकानें संचालित हैं जबकि इस वित्तीय वर्ष में 13 और दुकानें खोलने की तैयारी है। मुनस्यारी, नाचनी, तेजम और उडियारी जैसे क्षेत्रों में नई दुकानों की सुगबुगाहट होते ही विरोध शुरू हो गया है। महिलाओं का कहना है कि गांव-गांव शराब पहुंचने से युवाओं और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई के भरोसे के बजाय जिले के मलौन, खरतोली, पांखू, समकोट, होकरा, भैसखाल, राया समेत 15 से अधिक गांवों की महिलाओं ने स्वयं कड़े नियम लागू किए हैं। इन गांवों में शराब पीने या पिलाने पर 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नियम न मानने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय भी लिया गया है।
क्या कहती हैं महिलाएं
- शराब से हंसते-खेलते घर उजड़ रहे हैं। पर्यटक स्थल उडियारी में शराब की जगह पानी की सुविधा मिलनी चाहिए। हम दुकान नहीं खुलने देंगे। - ममता महरा, अध्यक्ष, महिला मंगल दल, उडियारी
- शराब घरेलू हिंसा की मुख्य जड़ है। मातृशक्ति एकजुट है और हम अपने क्षेत्र की शांति भंग नहीं होने देंगे। - हेमा महरा, ग्राम प्रधान, उडियारी
- हर जगह शराब पहुंचाना विकास नहीं, विनाश है। इससे आपसी कलह बढ़ रही है और समाज टूट रहा है। - नीमा बिष्ट, अध्यक्ष, महिला मंगल दल, खेतभराड़
- शराब की मार सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों पर पड़ती है। हम किसी भी कीमत पर नई दुकान का लाइसेंस स्वीकार नहीं करेंगे। - लता देवी, ग्राम प्रधान, तेजम