डाक्टरविहीन थल का महिला अस्पताल
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महिला उत्थान योजना के तहत सितंबर 2003 में खुले थल के महिला अस्पताल को इस समय संविदा में कार्यरत तीन नर्स चला रही हैं। अस्पताल में 2004 से डॉक्टर नहीं है और 2006 से फार्मेसिस्ट का पद भी खाली है। थल के 30 किलोमीटर के दायरे में कोई महिला अस्पताल नहीं है। इस कारण रोजाना 20 से 25 महिलाएं अस्पताल में आती हैं, लेकिन अस्पताल से उनको न तो दवा मिलती हैं और न उनकी कोई जांच होती है। गंभीर मरीजों को सीधे जिला अस्पताल ले जाने में ही लोग भलाई समझते हैं।
थल में महिला अस्पताल खोलते समय तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ ने कहा था कि इस अस्पताल में हर प्रकार की सुविधा होगी। इसमें स्टाफ की कोई कमी नहीं रहेगी। उनकी घोषणा के एक साल बाद ही एकमात्र डॉक्टर का यहां से तबादला हो गया और उनकी जगह तब से किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई। 2006 में अस्पताल से फार्मेसिस्ट का तबादला किया गया, लेकिन उनकी जगह भी किसी की तैनाती नहीं की गई।
लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि एकमात्र महिला अस्पताल की दशा इस तरह खराब कर दी गई है। नई सरकार से लोगों ने अस्पताल की दशा सुधरने की उम्मीद लगाई थी, लेकिन सरकार ने अब तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। अस्पताल पहुंचने के बाद लोगों को 50 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाएं चौपट कर रही सरकार
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदरी वर्मा का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को चौपट करने में तुली है। 14 साल से अस्पताल में एक डॉक्टर को तैनात न करना सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। वह कहती हैं कि अस्पताल में मानक के अनुसार तीन डॉक्टर होने चाहिए थे, लेकिन एक भी डॉक्टर यहां पर तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार ने इस अव्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया।
अब महिलाएं आंदोलन करेंगी
ग्राम प्रधान राधा देवी का कहना है कि सरकारें महिला उत्थान की सिर्फ बात करती है, व्यवहार में उसे लागू नहीं किया जाता। जब महिला अस्पताल में स्टाफ ही नहीं होगा तो लोगों को क्या सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल में सुविधाएं नहीं जुटाई गई तो अब महिलाएं ही आंदोलन की कमान संभालने को विवश होंगी। सरकार को गांवों की स्वास्थ्य सेवा सुधारनी चाहिए।