चंपावत। विकासखंड पाटी के त्यारसों गांव में आरती स्वयं सहायता समूह की नौ महिलाएं खेती और पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये महिलाएं मौसमी सब्जियों, फलदार पौधों और हरे चारे का उत्पादन करती हैं। अपने उत्पादों को स्थानीय बाजारों में सीधे बेचकर वे औसतन करीब 10 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
यह समूह वर्ष 2022 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित किया गया था। समूह की कुछ महिलाएं डेयरी और बकरी पालन भी करती हैं। पशुपालन से उन्हें दूध और अन्य उत्पाद मिलते हैं। इनकी बिक्री से महिलाओं को अतिरिक्त आय होती है।
समूह अध्यक्ष पुष्पा महरा ने बताया कि समूह के गठन के बाद महिलाओं को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं की जानकारी और प्रशिक्षण का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को खेती और पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में आगे बढ़ाने में मदद मिली। पुष्पा महरा ने बताया कि अब महिलाएं उत्पादन के साथ उत्पादों की बिक्री भी खुद कर रही हैं। इससे उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर लाभ मिल रहा है।
उत्पादों की सीधी बिक्री से मिला लाभ
प्रशिक्षण और सरकारी सहायता ने इन महिलाओं को सशक्त बनाया है। वे अब अपनी मेहनत का पूरा लाभ उठा रही हैं। उत्पादों की सीधी बिक्री से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।