उच्च हिमालयी क्षेत्रों के खराब रास्तों के कारण इस बार माइग्रेशन गांवों को लौट रहे लोगों के सामने दिक्कत आने वाली है। धारचूला और मुनस्यारी में दोनों तहसीलों में रास्तों की मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। धारचूला तहसील में तो दारमा घाटी में पैदल रास्तों की हालत इतनी खराब है कि उनमें जानवरों को ले जा पाना संभव नहीं हो सकता।
दारमा घाटी में माइग्रेशन वाले 15 अप्रैल से प्रवेश करने लगेंगे। दारमा घाटी जाने वाले रास्ते पर सेलाथा और स्यंगथा में रास्ता पूरी तरह टूटा हुआ है। इस रास्ते से नागलिंग गांव के लोग आवाजाही करते हैं। खराब रास्ते का मामला राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एनएस नपलच्याल के सामने भी पिछले दिनों लोगों ने उठाया था। दारमा घाटी के समाजसेवी मनोज नगन्याल ने कहा कि इन स्थानों से जानवरों को आरपार कराना किसी भी दशा में संभव नहीं है। रास्ते की मरम्मत हर हाल में 15 अप्रैल से पहले होनी जरूरी है, क्योंकि धारचूला तहसील में कुटी, गुंजी, गर्ब्यांग, नाभी गांव के लोग माइग्रेशन पर जाते हैं।
मुनस्यारी तहसील में भी मल्ला जोहार को जाने वाला रास्ता कई स्थानों पर खराब है। लीलम, पातो, मिलम, बोगड्यार, बुर्फू जाने वाले रास्ते पर कई जगह पैदल पुल टूटे हैं। बर्फ से रास्ता धंस गया है। मुनस्यारी क्षेत्र के माइग्रेशन गांवों को जाने वाले लोग अब कालामुनि तक पहुंच चुके हैं। अगले हफ्ते इनकी मूल गांवों को रवानगी होने लगेगी।
डीएम ने लोनिवि को जारी किए निर्देश
धारचूला। डीएम एचसी सेमवाल ने लोनिवि को निर्देश जारी किए हैं कि खराब रास्ते की तत्काल मरम्मत की जाए। उन्होंने कहा कि जल्दी से टीम भेजी जाए और मजदूरों को साथ ले जाकर रास्तों को सुधारा जाए। उन्होंने कहा कि रास्तों की मरम्मत तत्काल होगी और माइग्रेशन पर जाने वालों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी।