अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से रविवार को यहां आयोजित कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने वर्तमान हालातों पर जोश भरने का काम किया। कश्मीर की हालातों पर चिंता जताते हुए कवियों ने कहा कि अब पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त आ गया है।
युवा कवि ललित शौर्य ने कहा कि-पाक 1965, 1971 को याद कर ले, इस बार युद्ध हुआ तो न रहेगी पिंडी, न रहेगा इस्लामाबाद। डा. प्रमोद कुमार श्रोत्रिय ने जोशीले अंदाज में कविता सुनाकर कहा-अब भारत का मुकुट खोने नहीं देंगे, हम कश्मीर को पाक होने नहीं देंगे। हेमा थलाल ने मार्मिक कविता सुनाई-फुटपाथ पर पड़ा था, भूख से मरा था, कपड़ा उठा के देखा तो, सीने पर सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा लिखा था। आशा सौन ने जवानों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा-अब जाके अगर मैं वापस आया, तेरे माथे का टीका बन जाऊंगा और लौटने की उम्मीद गर न हो बाकी, सीने पर रखे तमगों से तेरी शान बढ़ाऊंगा।
डा. आनंदी जोशी ने शहीदों को याद करते हुए कहा-कर माटी का रक्ताभिषेक, था मिला जिन्हें हर्षातिरेक, है उन्हें समर्पित श्रद्धांजलि, है समर्पित उन्हें दीप एक। इस दौरान डा. तारा सिंह, लक्ष्मी आर्या, आयुष जोशी, संदीप महर, हेम पांडे, राजा बिष्ट, अखिलेश सिंह, भावना धामी, आशा मोहन, मेघा पंत, पूजा सती आदि ने भी रचनाएं सुनाई।