15 फरवरी को विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर सारे प्रशासनिक अमले और राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने वाले क्वीरीजिमियां के लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है। सड़क, संचार, आपदा पुनर्वास जैसे मुद्दों को लेकर वर्ष 2010 से लगातार आवाज उठा रहे गांव के लोगों ने कहा कि समस्या का समाधान न होने पर भविष्य में भी हर चुनाव का बहिष्कार करते रहेंगे।
क्वीरीजिमियां के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान काफी पहले कर दिया था। उनके इस ऐलान के बाद जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा के आदेश पर प्रशासन की टीम उनको मनाने के लिए भी गई थी। प्रशासन इसी प्रयास में था कि किसी तरह लोगों को मतदान के लिए राजी करा दिया जाए, लेकिन गांव के लोग समस्याओं के समाधान के लिए लिखित आश्वासन मांगने पर अड़ गए।
क्वीरीजिमियां के प्रधान रेनू देवी ने कहा कि सरकार को गांव के लोगों की नाराजगी और गुस्से को समझना चाहिए। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देश में गांव के लोग जब अपने सबसे बड़े मौलिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर रहे हों तो समझ लेना चाहिए कि गांव के लोगों की पीड़ा कितनी गहरी है। प्रधान ने कहा कि भविष्य में होने वाले पंचायत चुनाव, लोकसभा चुनाव का भी गांव के लोग बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल सड़क, संचार की व्यवस्थाएं करनी चाहिए और लोगों के कष्टों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।