कैलास मानसरोवर की यात्रा के दौरान यदि कोई आपात स्थिति आती है तो यात्रियों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध रहेगा। हेलीकाप्टर स्टैंडबाय में देहरादून में रहेगा। कैलास यात्रा धारचूला से आगे कठिन पैदल रास्ते से होती है। इस रास्ते में भूकटाव की आशंका रहती है एवं कई जगह बरसाती नाले और झरने उफनते हैं। यदि कोई यात्री बीमार हो गया या फिर पैदल रास्ते में उसे चोट आ जाए तो उसे तत्काल बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था रहेगी।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि पिछले दिनों कैलास यात्रा की तैयारी के लिए जिला स्तर पर हुई बैठक में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने पर चर्चा की जा चुकी है। साथ ही शासन को इस आशय का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, अब नाथुला दर्रे से भी कैलास यात्रा होने लगी है लेकिन ज्यादातर यात्री अब भी उत्तराखंड के रास्ते आना पसंद करते हैं। यह रास्ता काफी प्राचीन है और पहले भी लोग इन रास्तों से यात्रा पर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा मार्ग में खतरे भी रहते हैं। इस कारण यात्रियों की सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जाएंगे।
अच्छी बारिश की संभावना ने बढ़ाई चिंता
पिथौरागढ़। मौसम विभाग ने इस बार मानसून सीजन में औसत से ज्यादा बारिश होने की भविष्यवाणी की है, यदि बारिश अधिक होती है तो यात्रा संचालन में कठिनाई आएगी। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि यदि ज्यादा बारिश होती है तो कठिनाई बढ़ जाएगी। कैलास यात्रा ठीक मानसून काल में जून से लेकर सितंबर तक होती है। बारिश के दौरान सड़क मार्ग बंद होने, पैदल रास्ते बहने की आशंका अधिक रहती है। पैदल रास्ता धारचूला तहसील में है और धारचूला भूस्खलन की दृष्टि से सबसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र है।
निगम अगले माह भेजेगा पड़ावों में सामान
पिथौरागढ़। केएमवीएन मई में यात्रा पड़ावों के लिए सामान की सप्लाई करेगा। इसमें राशन, बिस्तर जैसी सामग्री रहेगी। यात्रियों के लिए मई के अंत तक सभी पड़ावों में पेयजल, शौचालय की व्यवस्था कर दी जाएगी। केएमवीएन के महाप्रबंधक ने बताया कि इस बार कई पड़ावों पर हट्स तैयार हो गए हैं। इस कारण आवासीय समस्या नहीं रहेगी, यदि छोटा कैलास यात्रियों के दल भी साथ-साथ चलें तो किसी भी पड़ाव में आवास, भोजन की समस्या नहीं होगी।
अब तक 1080 यात्रियों का पंजीकरण
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कैलास यात्रा के लिए अब तक 1080 यात्रियों का पंजीकरण हो गया है। पंजीकरण की तिथि 15 अप्रैल तक किए जाने से यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड से होकर जाने वाली यात्रा में एक दल को दिल्ली से चलकर वापस दिल्ली पहुंचने में 25 दिन का समय लगेगा। उत्तराखंड से होने वाली यात्रा में एक यात्री का खर्च 1.50 लाख रुपये आएगा। उन्होंने जानकारी दी कि नाथुला दर्रे से इस बार सात दल जाएंगे। नाथुला दर्रे से यात्रा के लिए अब तक 350 पंजीकरण हुए हैं। नाथुला दर्रे से यात्रा 23 दिन में पूरी होगी। एक यात्री का खर्च 1.70 लाख रुपये आएगा। विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर सेनानी ने बताया कि इस बार यात्रा में 18 से 70 वर्ष के उम्र के यात्री ही शामिल होंगे।