पिथौरागढ़। मुनस्यारी में कई प्रवासी पक्षी आते हैं। नार्थन पिनटेल डक अनास अक्यूटा, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट समेत कई पक्षी क्षेत्र में दिखाई दिए हैं लेकिन पैल्लास गुल इचिथियेटस (ब्लैक हेडेड सी गुल) पक्षी 15 साल से नहीं दिखाई दिया है। लंबे समय बाद भी पक्षी के नहीं दिखने से पर्यावरण प्रेमियों में मायूसी है। पक्षी प्रेमियों को गुल पक्षी के यहां आने का बेसब्री से इंतजार है।
सरमोली में परिस्थिति विज्ञान शास्त्री रामनारायण और कैप्टन अशोक ने अगस्त 2005 में सरमोली क्षेत्र में पैल्लास गुल पक्षी को देखा था, जो उड़ने में असमर्थ था। इसके बाद उसकी देखभाल की गई लेकिन कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। प्रकृति शिक्षक रामनारायण ने बताया कि हो सकता है पक्षी को चोट लगी हो या वह बीमार हो गया हो या फिर अन्य पक्षी ने उसे खाने का प्रयास किया हो। संभवत: उस कारण गुल पक्षी यहां उतर गया हो। उस वाकिये के बाद किसी ने भी क्षेत्र में गुल पक्षी को नहीं देखा। उन्होंने बताया कि जून 2017 में थामरी कुंड में नार्थन पिनटेल डक अनास एक्यूटा और अक्तूबर 2016 में जोहार घाटी में त्रिलोक सिंह राणा ने ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट को देखा था।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों से कई प्रवासी पक्षी मुनस्यारी में रुकते हैं, या इस रास्ते से गुजरते हैं लेकिन ज्यादा ऊंचाई में होने के चलते उनके बारे में जानकारी नहीं हो पाती है। जब वो यहां उतरते हैं तब उनके बारे में पता चलता है। गोरी नदी क्षेत्र के मुनस्यारी, डीडीहाट, धारचूला, बंगापानी क्षेत्र के ऊपर से कई प्रवासी पक्षी गुजरते हैं। उनमें कई यहां रुकते भी होंगे। उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं हैं। प्रवासी पक्षी हिमालय को पार करते हुए कार्बेट पार्क, नानकमत्ता, नेपाल के शुक्ला फांटा में उतर जाते हैं। वहां उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलता है। - रामनारायण, पारिस्थितिकी विज्ञान शास्त्री और प्रकृति शिक्षक, चेन्नई
लास्पा कैंप से बर्फ हटाते बीआरओ के कर्मी।- फोटो : PITHORAGARH