मुनस्यारी-मिलम रोड निर्माण में बाधा बनी कठिन चट्टान
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सीमा सुरक्षा का हाल मिलम से मुनस्यारी तक की सड़क को देखकर लगाया जा सकता है। तिब्बत सीमा की ओर मुनस्यारी से मिलम के लिए वर्ष 2008 से बनाई जा रही 65 किलोमीटर लंबी सड़क अब तक पूरी नहीं हुई है। पहले तय हुआ था कि सड़क 2012 तक बना ली जाएगी। आसानी से मिलम ग्लेशियर तक पहुंचने और मल्ला जोहार के दर्जनों गांवों को जोड़ने के लिए इस सड़क को बनाया जा रहा है। अब 2020 तक इस सड़क को बनाना तय किया गया है।
मिलम ग्लेशियर तक सड़क पहुंचाने की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास है। बीआरओ ने काम को अलग-अलग टुकड़ों में एबीसीआई और जीवीके कंपनी को सौंपा हुआ है। यह सड़क भी धारचूला-लिपुलेख की तरह ही दो ओर से बन रही है। मिलम से मुनस्यारी की तरफ 20 किलोमीटर और मुनस्यारी से मिलम की तरफ 14 किलोमीटर सड़क का निर्माण इन आठ सालों में हो पाया है। सड़क पर चार पुल तैयार हुए हैं। अभी छह पुल और बनने हैं। एबीसीआई कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि काम में प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। मिलम में सामान पहुंचाने के लिए एमआई हेलीकॉप्टर उतारने को जगह नहीं मिल पा रही है। मजदूरों के टेंट लगाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। बीआरओ के स्थानीय अधिकारी इस मामले में कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।
मिलम सड़क का भी सामरिक नजरिए से महत्व है। मिलम से तिब्बत बार्डर की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। 1960 से पहले सीमांत के व्यापारी कुंगरी बिंगरी दर्रा पार कर तिब्बत की ज्ञानिमा मंडी में व्यापार के लिए जाते थे। 1960 में चीन के साथ संबंध खराब होने के कारण यह व्यापार बंद हो गया। धारचूला के लिपुलेख दर्रे से तो वर्ष 1992 में फिर से व्यापार होने लगा है। अभी तक ज्ञानिमा मंडी से व्यापार शुरू करने की पहल नहीं हो पाई है। मिलम तक सड़क पहुंचाने में कठिन चट्टान की बाधा खड़ी हो रही है। इसी कारण धापा से आगे और मिलम से मुनस्यारी की तरफ कई जगह काम कठोर चट्टान होने के कारण ही रोका गया है। मल्लाजोहार निवासी राम सिंह का कहना है कि सड़क बनाने में ज्यादा देरी नहीं की जानी चाहिए।
सड़क के मामले में केंद्र सरकार पहल करे
उत्तराखंड वन विकास निगम के अध्यक्ष और दर्जा राज्यमंत्री हरीश धामी का कहना है कि मिलम तक सड़क पहुंचाने में हो रही देरी के मामले में केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए। बीआरओ केंद्र के अधीन है। सांसदों को भी यह मुद्दा उठाना चाहिए। अपने स्तर से भी वह लगातार केंद्र सरकार से पत्र व्यवहार कर रहे हैं।