अस्कोट के बगड़ीहाट, बेड़ा, हिनकोट, देवल, लेकमकांडा, खोलियागांव, कूटा, जमराड़ी, दारती समेत सभी गांवों में किसान खेतों में जाकर यही सोच रहे हैं कि इस बार बीज के लिए दाना कैसे निकलेगा।
सूखे से खेत खाली पड़े हैं। गेहूं के बीज जमीन से ऊपर नहीं आए। किसानों को पिछले वर्ष बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि की मार सहनी पड़ी थी। सरकार ने मुआवजे का वितरण तो किया लेकिन उसमें इतनी खामियां रह गई कि सभी को मुआवजे की राशि ही नहीं मिल पाई। इस बार पहले तो मानसून सीजन में कम बारिश हुई। अब शीतकाल में बारिश न होने से किसान ज्यादा संकट में आ गए हैं।
गेहूं, मसूर, चना, मटर, जौ की फसल चौपट हो गई है। सब्जियों और फलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। किसानों को इस बात को लेकर आश्चर्य है कि अब तक सरकार ने न तो सर्वे कराया है और न मुआवजे के लिए ही कार्रवाई की है। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि इस बार की फसल तो चौपट हो ही गई है। बारिश न होने पर अगली फसल को भी समय पर नहीं बो पाएंगे। अब देखना है कि इस बार की सूखे की स्थिति में सरकार किसानों को किस तरह की राहत देती है।