विगत दिन की ओलावृष्टि से बाराबीसी (देवलथल) और कनालीछीना क्षेत्र में भी गेहूं, मसूर की फसल चौपट हो गई है। ओलावृष्टि के निशान खेतों में अब भी बरकरार हैं। किसानों ने नुकसान का आंकलन कर मुआवजा मांगा है।
बाराबीसी क्षेत्र के ग्राम पंचायत उसैल, लोहाकोट, चौपाता, उड़ाई, थालगांव, सौगांव, बमडोली, अगन्या, सील, बडलचमू, मुसगांव, हराली, बिछुल, रसैपाटा, अलगड़ा क्षेत्र में रविवार को हुई ओलावृष्टि ने तबाही मचाई है। पकने को तैयार गेहूं, मसूर की फसल के बर्बाद होने से किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि बीज लायक भी गेहूं, मसूर खेतों में नहीं बचा है।
कनालीछीना के सतगड़, सुरूण, सिरोली, कापड़ीगांव, विशूनाखान, ख्वांतड़ी, गुड़ौली, मलान, चरमा, दौला, चौकी, ख्वांकोट, पाली, रतोली, डुंगरी, छड़नदेव, भौतड़, लीमाचौड़ा, न्वाली, चमडुंगरी, गैंडाली, ढटखोला में ओलावृष्टि से खेती चपट हो गई है। कंडाली के प्रधान होशिार सिंह, सिरोली के प्रधान मनोज सिरोला, भौतड़ी के प्रधान होशियार राम, चौकी के प्रधान शंकर राम, गुड़ौली की प्रधान पार्वती देवी आदि ने तहसीलदार के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजे पत्र में फसल का मुआवजा देने की मांग की है।
काोट
ओलावृष्टि से बाराबीसी क्षेत्र में फसल चौपट हो गई है। किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। - जगदीश कुमार, जिला पंचायत सदस्य दिगरा मुवानी
किसानों के पास इस बार बीज लायक भी अनाज नहीं बचा है। खेत में ही अनाज बर्बाद होने से किसान परेशान हैं।
किसानों की मदद के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। - शंकर सिंह सामंत, ग्राम प्रधान लोहाकोट
क्षेत्र के लोग खेती, किसानी कर जीवन यापन करते हैं। ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों को तत्काल मदद नहीं मिली तो वह दिक्कत में आ जाएंगे। - श्याम दत्त जोशी, भूतपूर्व सैनिक बाराबीसी
पहाड़ में छोटी जोत के किसान होते हैं। खेती में कुछ समय का राशन पैदा हो जाता था। इस बार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है, राहत मिलनी चाहिए। - भगवान सिंह नेगी, पूर्व शिक्षाधिकारी बाराबीसी