सीएम के लोकार्पण के छठे दिन आखिरकार नवनिर्मित आंवलाघाट योजना से पानी मिल ही गया। हालांकि, लाइनों में जंग के चलते नलों में गंदा पानी आया। इस कारण लोगों ने इस पानी का इस्तेमाल नहीं किया। वहीं, सिर्फ एक ही क्षेत्र में पानी की आपूर्ति करने से शहर के अन्य हिस्सों पर पेयजल संकट बरकरार रहा। जल संस्थान को प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से आपूर्ति करनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को आंवलाघाट से सवा लाख लीटर पानी लिया गया। जल संस्थान ने इस पानी से लोनिवि जोन में आपूर्ति की, लेकिन लाइनों में जंग के चलते लोनिवि जोन के घरों और स्टैंडपोस्ट में गंदा पानी आया। एक बार फिर गंदा पानी आने से खड़कोट, सेरा, लिंठ्यूड़ा, घंटाकरण, बैंक रोड, सिल्थाम आदि क्षेत्रवासी आशंकित हो गए। उन्होंने इस पानी का पीने में इस्तेमाल ही नहीं किया। इस बीच गंदा पानी आने पर जल संस्थान ने भी आंवलाघाट योजना से और पानी लेने से हाथ पीछे खींच लिए।
इधर, नवनिर्मित पेयजल योजना से आपूर्ति सुचारु न होने से नगर और आसपास के क्षेत्रों में समस्या बरकरार रही। क्षेत्रवासियों को मांग की तुुलना में 50 फीसदी पानी ही मिल पाया। नगर के डिग्री कॉलेज, सरस्वती विहार, पांडेगांव, जीआईसी रोड, सिमलगैर, जगदंबा कालोनी के साथ ही विण, दौला, बजेटी में पानी की समस्या हुई। नलों से पर्याप्त पानी न आने पर क्षेत्रवासियों को नौलों, धारों और स्टैंडपोस्ट से पानी ढोना पड़ा।
जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर भेजे, लेकिन नाकाफी साबित हुए। जल संस्थान के ईई विशाल कुमार ने बताया कि जल निगम पेयजल लाइनों की सफाई करा रहा है। इसके चलते आंवलाघाट से आपूर्ति सुचारु नहीं हुई। पहले दिन थोड़ा पानी लिया गया। लाइनों में जंग आदि के चलते नलों में गंदे पानी की आपूर्ति हुई। आंवलाघाट के पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा पाई गई। हालांकि उन्होंने पानी को साफ बताया।
ग्रामीण क्षेत्रों में गहराया संकट
पेयजल की कमी के चलते नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी संकट गहरा गया है। नगर से सटे पर्यटक स्थल चंडाक क्षेत्र में छेड़ा, दिगतोली में पानी की समस्या गहरा गई है। जाजरदेवल से आगे सल्मोड़ा में भी पानी का संकट बना है। पेयजल योजनाओं के डिस्चार्ज में कमी आने और गर्मी के साथ ही मांग बढ़ने से दिक्कत आई है। बृृहस्पतिवार को जल संस्थान ने प्रभावित गांवों में टैंकरों से आपूर्ति की। हालांकि भारी मांग को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति नाकाफी रही। ग्रामीणों को आसपास के जलस्रोतों से पानी ढोना पड़ा।