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पानी को तरसी 20 हजार की आबादी

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धारचूला में पेयजल स्रोतों से पानी लाते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला(पिथौरागढ़)। गलाती गाड़ और घटखोला के उफान में आने से तीन पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे नगर के सात वार्ड, गलाती, हाट, बगीचा और ग्वाल गांव में पेयजल का संकट गहरा गया है। लोगों तीन किमी पैदल, बाइक और कार से प्राकृतिक स्रोतों से घरों के लिए पेयजल आपूर्ति कर रहे हैं। करीब बीस हजार की आबादी पानी को परेशान है।
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सामाजिक कार्यकर्ता नंदा बिष्ट ने कहा कि आपदा से पहले बड़े-बड़े दावे करने वाली संस्थाओं की पोल खुल रही है। पहली आपदा में ही वैकल्पिक व्यवस्था ना होना क्षेत्र के प्रति उनकी लापरवाही दिखाता है। जनता पानी के लिए परेशान है। स्थानीय योगेश गर्ब्याल और नेत्र कुटियाल ने कहा कि नगर वासियों को पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोग अपनी गाड़ियों से एलधारा और हैंडपंप से पानी लाने को मजबूर हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद लोगों को पानी मिल पा रहा है। विभाग ने अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। व्यापार मंडल महासचिव नवीन खर्कवाल ने कहा कि एक तरफ आपदा से जनता पीड़ित है। तो दूसरी ओर विभाग की बेरुखी से जनता परेशान है। कहा समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
गलाती और घटखोला गाड़ के बड़े जलस्तर के कारण पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हुई है। पाइप बह गए हैं। युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल्दी ही पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। - सुरेंद्र थापा, जेई, जल संस्थान, धारचूला
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महाकाली मंदिर को जाने वाले पैदल मार्ग में बह रहा गंदा पानी
गंगोलीहाट(पिथौरागढ़)। महाकाली मंदिर पैदल मार्ग और सड़क की हालत खस्ता है। मंदिर जाने वाले मोटर मार्ग में नालियों में अतिक्रमण के चलते बाजार का पानी मंदिर सड़क पर बहता है, जिससे रावलगांव के भीम सिंह रावल सहित अन्य ग्रामीणों के खेत बह गए। अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में तत्कालीन एसडीएम डा. सौरभ गहरवार ने महाकाली विद्या मंदिर के पास स्कवर खुलवा कर पक्का निर्माण करके नाली बनवाई गई थी लेकिन उनके स्थानांतरण होते ही वह पक्का निर्माण तोड़ कर फिर से सड़क में पानी का नाला छोड़ दिया गया है। यह गंदापानी जान्हवी नौले के पानी को प्रदूषित कर रहा है। मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र रावल का कहना है कि बार-बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से कहने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दो दिन पूर्व हुई भारी बारिश से यह मार्ग पूरी तरह से मलबे से पट गया है। कई खेतों को भी फिर से नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संवाद
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