पिथौरागढ़। नगर के कई हिस्सों में एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। तीसरे दिन भी जरूरत का पानी नहीं मिल पाता है। इसके चलते लोगों को जल स्रोतों या फिर हैंडपंपों से आपूर्ति करनी पड़ती है।
नगर और आसपास के गांवों की आबादी एक लाख से अधिक है। दो दशक पहले तक नगर में घाट पंपिंग योजना से ही पानी की आपूर्ति की जाती थी। वर्तमान में घाट के साथ ही ठूलीगाड़, आंवलाघाट पंपिंग योजनाओं के अलावा रई, महादेव में बनी छोटी पंपिंग पेयजल योजनाओं से भी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद लोगों को रोज पानी नहीं मिल पा रहा है।
नगर के जीआईसी, सरस्वती विहार, तिलढुकरी सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर एक दिन छोड़कर पानी आता है। तीसरे दिन भी अधिकतर लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल पाता है। एक दिन छोड़कर पानी आने से लोगों को तमाम जरूरतों के लिए हैंडपंपों, नौले-धारे सहित अन्य स्रोतों से पानी जुटाना पड़ता है। विभाग के अनुसार आबादी के हिसाब से स्टोरेज टैंक नहीं होने के कारण यह समस्या पैदा हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए नए टैंकों का निर्माण प्रस्तावित है।
नगर के कई इलाकों में लोगों को रोज पानी नहीं मिल रहा है जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम में मांगी गई सूचना के अनुसार तमाम योजनाओं से 16 एमएलडी पानी मिल रहा है। वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए विभाग को नए टैंक बनाने चाहिए।
-भगवान सिंह रावत, संयोजक, जनमंच पिथौरागढ़।
योजनाओं से पर्याप्त पानी मिल रहा है। आबादी के हिसाब से अधिक स्टोरेज क्षमता वाले टैंक नहीं होने से समस्या पैदा हो रही है। नगर के अलग-अलग क्षेत्रों में नए टैंकों के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं। नए टैंक बनने के बाद पेयजल आपूर्ति सुचारु हो जाएगी।
-सुरेश चंद्र जोशी, ईई जल संस्थान पिथौरागढ़।