मदकोट के पास देवीनगर, सेरा, टांगा के जंगलों में विभिन्न प्रकार की खूबसूरत पक्षियों की चहचहाट लोगों को खूब आकर्षित करती हैं। अपेक्षाकृत छोटे आकार वाले यह पक्षी काफी दूर तक उड़ान भरते हैं और फूलों का रस चूसकर पेट भरते हैं। वसंत के आगमन के साथ ही इस घाटी में कई प्रकार के जंगली फूल खिलने लगे हैं। बर्ड वाचरों का कहना है कि यह पक्षी यहां के स्थायी निवासी हैं। यह सीजनल माइग्रेशन नहीं करते। अलबत्ता सर्दियों में कुछ नए मेहमान पक्षी जरूर इनके कुनबे को बढ़ा देते हैं। घाटी वाले इस इलाके में फरवरी से ही गर्मी की तपिश बढ़ने लगती है। गोरी और मदकिनी के पानी से पशु और पक्षी दोनों ही प्यास बुझाते हैं।
बर्ड वाचरों को शुक्रवार को रूपस शिबिया, गोल्डन बुश रॉबिन, बार थ्रोटेड शिवा, ब्ल्यू फ्रोंटेड रेड स्टार्ट, व्हिसलिंग थ्रश, मिनिवेट ट्री पाई, ब्राउन डीपर, कैपेड रेड स्टार्ट जैसे पक्षी नजर आए। इनका एक छोटा सा समूह होता है। इसी समूह के साथ यह भोजन की तलाश करते हैं। गोरी के गर्म घाटी वाले इलाकों में जैव विविधता बहुत अधिक है। यहां पर बड़े-बड़े पेड़, झाड़ियां, छोटे पौधे, फूल, घास बड़ी मात्रा में प्राकृतिक रूप से उग आती है। यही जैव विविधता पक्षियों को सुगम जीवन जीने का वातावरण भी देती है।
मोनाल संस्था की ओर से चलाए जा रहे बर्ड वाचिंग कैंप में शुक्रवार को भी स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से और अमर उजाला के इंटरनेट संस्करण के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले पक्षी प्रेमियों को इस अद्भुत किस्म के कैंप की जानकारी मिल रही है। गुजरात, पुणे, कोलकाता, दिल्ली, राजस्थान से कई पक्षी प्रेमियों ने मुनस्यारी आने की इच्छा जताई है। कैंप में पुष्कर आर्या, केदार सिंह पांगती, दीपक कोटाल आदि ने सहयोग किया। यह कैंप अभी कुछ दिन तक जारी रहेगा।