वनरावत किसी भी पार्टी के फोकस ग्रुप में नहीं
- फोटो : अमर उजाला
हिमालय की आदिम जनजाति वनरावत वोटों के हिसाब से किसी भी पार्टी के फोकस ग्रुप में शामिल नहीं हो पाए हैं। इसकी वजह यह है कि इस जनजाति के मतदाताओं की संख्या मात्र 275 है। कोई भी राजनैतिक दल इस जनजाति को अपने एजेंडे का हिस्सा मानकर नहीं चलती। यह बात अलग है कि जनजाति के उत्थान को लेकर हर राजनैतिक दल बातें जरूर करता है।
पिथौरागढ़ जिले के आठ गांवों में रहने वाले वनरावतों की कुल आबादी 750 है लेकिन मतदाता सूची में सिर्फ 275 लोगों के नाम दर्ज हैं। वनरावतों में खुद भी राजनैतिक चेतना का अभाव रहा है। वह पार्टी, दलों का चरित्र जैसी बातों को नहीं पहचानते। वोट देने के लिए यह लोग जरूर जाते हैं लेकिन राजनैतिक दलों के लोगों को पता है कि इतनी कम वोटों वाले समुदाय से कोई परिणाम तो ज्यादा प्रभावित नहीं हो सकते। इसलिए इन पर ज्यादा समय न खर्च किया जाए। वन रावतों का भी मानना है कि किसी भी राजनैतिक दल ने उनसे वोट मांगने के लिए कभी आग्रह नहीं किया। प्रचार के दौरान भी वनरावतों के गांवों तक प्रत्याशी और उनके समर्थक कम संख्या में ही जाते हैं। वनरावत शेर सिंह का कहना है कि एक प्रकार से उनकी उपेक्षा ही होती रही है।
वनरावत गगन सिंह दो बार विधायक बने
धारचूला विधानसभा सीट पर जनजातियों और गैरजनजातियों के झगड़े का फायदा दो बार वनरावत गगन सिंह रजवार उठा ले गए। वर्ष 2002 में हुए प्रथम चुनाव में गगन सिंह ने कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह को हराया था। तब गगन सिंह को 12537 वोट मिले। 2007 में भी गगन सिंह दोबारा निर्दलीय मैदान में उतरे। तब उन्होंने भाजपा के कुंदन सिंह टोलिया को हरा दिया। गगन सिंह को वर्ष 2007 में 13308 वोट मिले थे। 2012 के चुनाव के समय गगन सिंह फिर से मैदान में उतरे लेकिन तब उनको हार का मुंह देखना पड़ा। तब से उनकी राजनैतिक गतिविधियां एक प्रकार के ठप हो गईं।