पिथौरागढ़ नगर के पुरानी बाजार में तैयार होते रावण कुल के पुतले। स्रोत:पुतला कमेटी।
पिथौरागढ़। नगर में मनाए जाने वाला विजय दशमी पर्व मजहबी एकता और इंसानी रिश्तों का उदाहरण पेश करता है। यहां हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोग रावण कुल के पुतले तैयार करते हैं। बाकायदा इनके दहन में मुस्लिम समुदाय के लोग उत्साह के साथ भागीदार बनते हैं।
नगर के पुराना बाजार में पुतला कमेटी हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक है। पुराना बाजार में ही विजयदशमी पर्व के लिए रावण कुल के पुतले तैयार होते हैं। कुंभकर्ण, मेघनाद और ताड़का का पुतला तैयार करने की जिम्मेदारी वर्षों से अकबर खान ने संभाली हुई है। उनके नेतृत्व में ही पुतले तैयार किए जाते हैं। इसमें हिंदू समुदाय के लोग बराबर की भागीदारी निभाते हैं। एक तरफ शिव मंदिर और दूसरी तरफ मस्जिद के बीच में तैयार होते ये पुतले हिंदू और मुस्लिम समुदाय की एकता की मिसाल बने हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह महरा ने बताया कि इन पुतलों को हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग नगर की परिक्रमा के बाद रामलीला मैदान पहुंचाते हैं। यहां विजयदशमी को इनका दहन होता है। इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी भागीदार बनते हैं। संवाद
पुतलों को दिया जा रहा है अंतिम रूप
पुराना बाजार में रावण कुल के पुतलों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अकबर खान के नेतृत्व में पुतले तैयार करने का काम जोरों पर चल रहा है। खासियत यह है कि इन पुतलों को तैयार करने में मांस की दाल को पीसकर इसका लेप उपयोग में लाया जाता है। पुतला तैयार करने में उमेश लाल शाह, सुनील वर्मा आदि सहयोग दे रहे हैं।