वनरावत आवासीय विद्यालय के संचालन को लेकर चर्चा करते एनजीओ के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
पांच वर्ष से आर्थिक संकट से जूझ रहे जौलजीबी के वनरावत आवासीय विद्यालय का संकट अब दूर होने की उम्मीद जगी है। दिल्ली की एनजीओ सार्थक प्रयास ने विद्यालय की सारी व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी ले ली है। शुक्रवार को संस्था के प्रतिनिधियों ने जौलजीबी जाकर विद्यालय की जरूरतों, वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी हासिल की। विद्यालय में इस समय 45 बच्चे पढ़ते हैं। इनके आवास और भोजन की व्यवस्था विद्यालय में ही की जाती है। इसके अलावा आठ लोगों का स्टाफ विद्यालय में कार्यरत है।
सार्थक प्रयास संस्था के प्रबंधक उमेश चंद्र पंत के नेतृत्व में जौलजीबी पहुंची टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया और स्टाफ से वार्तालाप कर इस स्कूल को शीघ्र ही अपने अधीन लेने की बात की। ताकि इस स्कूल में पढ़ने वाले 45 वनरावत बच्चों को स्कूल छोड़कर न जाना पड़े। पिथौरागढ़ के पूर्व विधायक और इस स्कूल के संस्थापक हीरा सिंह बोरा के निधन के बाद इस स्कूल की आर्थिक हालत काफी बिगड़ गई है। अब सार्थक प्रयास संस्था ने केंद्र सरकार से पांच साल से रुका हुआ अनुदान रिलीज करा दिया है।
संस्था विद्यालय की सारी व्यवस्थाओं का संचालन खुद करेगी और एक बेहतरीन माहौल में वनरावतों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा दी जाएगी। शिक्षाविद चारू चंद्र तिवारी ने कहा कि यह विद्यालय उन परिवारों के बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहा है, जो परिवार दो जून की रोटी के लिए रोज संघर्ष करते हैं। निरीक्षण के दौरान भुवन चंद्र सती, राजेंद्र भट्ट आदि मौजूद थे।