ब्राडबैंड सेवा उपलब्ध न होने के कारण नाचनी का उपकोषागार तीन महीने बाद भी नहीं खुल पाया है, जबकि भवन का चयन, स्टाफ की तैनाती तक हो चुकी है। इलाके में लैंडलाइन सेवा दस वर्षों से चरमराई है। अब तक थ्रीजी को नहीं जोड़ा गया है, जिससे अन्य कार्य भी प्रभावित होते हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा के अनुरूप नाचनी में उपकोषागार खोलने के लिए मार्च में देहरादून से चयन टीम नाचनी पहुंची। जिलाधिकारी एचसी सेमवाल की मौजूदगी में सर्वे टीम ने नाचनी पहुंचकर नवनिर्मित भवन में उपकोषागार के संचालन के लिए तीन कक्षों का चयन किया, लेकिन चयन प्रक्रिया के तीन महीने बाद भी उपकोषागार नहीं खुल पाया है।
नाचनी में उपकोषागार खुलने से तल्ला जोहार क्षेत्र के 96 राजस्व गांवों के साथ ही बागेश्वर जिले में कपकोट के 30 राजस्व गांवों को लाभ मिलता। उधर, जिला कोषाधिकारी भूपेंद्र प्रसाद कांडपाल का कहना है कि शासन स्तर से सभी प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। संचार की ब्राडबैंड, लैंडलाइन जैसी व्यवस्था न होने के कारण यह मामला अटका है।