पिथौरागढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड मशीनें तो लगा दीं, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए जरूरी रेडियोलॉजिस्ट का पद आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड) के मानकों में बदलाव के चलते समाप्त हो गया है। ऐसे में सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई है। सवाल उठता है कि यहां लगाईं गईं अल्ट्रासाउंड मशीनों का क्या होगा... क्या वे यूं ही जंग खाती रहेंगी।
मशीन होने के बावजूद मरीजों, गर्भवतियों को जेब ढीली कर जांच के लिए जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों की दौड़ लगानी पड़ेगी। संवाद
तीन लाख से अधिक की आबादी सरकारी अस्पतालों पर निर्भर
धारचूला में संयुक्त चिकित्सालय जबकि गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, डीडीहाट, मुनस्यारी में सीएचसी संचालित हैं। इन सभी में अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। तीन लाख से अधिक की आबादी उपचार के लिए इन अस्पतालों पर निर्भर है। पहले सभी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत थे। लोगों को उम्मीद थी कि कभी न कभी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी और इन अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हो जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के प्रयास तो नहीं हुए उल्टा इसका पद ही सीएचसी से समाप्त कर दिया गया है। संवाद
महीने में एक दिन हो रहा अल्ट्रासाउंड
पिथौरागढ़। धारचूला संयुक्त चिकित्सालय के साथ ही प्रत्येक सीएचसी में लाखों रुपये से अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी गईं हैं। इनके संचालन के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से लंबे समय से ये मशीनें बंद हैं। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से महीने में एक दिन रेडियोलॉजिस्ट को भेजकर अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। शेष दिन मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी होती है। संवाद
जब उप जिला चिकित्सालय का मिलेगा दर्जा तब हो पाएगी तैनाती
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मानकों के अनुसार सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिलने पर यहां रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित हो सकता है। ऐसे में सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा देने के बाद इनमें सुविधाओं का विस्तार करना भी चुनौती होगा। संवाद
पिथौरागढ़ के सीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि आईपीएचएस के मानकों के अनुसार संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हो गया है। यदि सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिलता है तो पद सृजित हो सकता है। शासन स्तर पर इस पर विचार चल रहा है।