टेंट में रह रहे हैं उड़मा गांव के आपदा प्रभावित
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बस्तड़ी से सटे उड़मा के लोग भी अपने गांव वापस जाने में घबरा रहे हैं। 30 जून की रात उड़मा में भी तबाही की मंजर रहा। उड़मा के 16 परिवार एक जुलाई को अपने घर छोड़कर शिफ्ट हो गए थे। इनमें से दो परिवार सिंघाली में लगाए गए टेंट में रह रहे हैं, जबकि दो परिवारों ने सिंघाली में किराए के कमरे ले रखे हैं। 12 परिवारों ने जीआईसी सिंघाली में शरण ले रखी है।
उड़मा गांव के लक्ष्मण सिंह और जगत सिंह ने बताया कि ज्यादा दिन तक टेंट में रह पाना संभव नहीं है। मुख्य समस्या जानवरों के लिए हो रही है। टेंट में बारिश के कारण सीलन ज्यादा है। इससे बच्चों और महिलाओं के बीमार होने का खतरा बढ़ रहा है। वह चाहते हैं कि कहीं पर आवास की स्थायी व्यवस्था की जाए। सिंघाली बाजार में किराए पर रह रहे जीवन सिंह और जगदीश सिंह ने कहा कि किराए में कब तक जिंदगी कटेगी, कहा नहीं जा सकता। वह भी यही कहते हैं कि जल्दी से आवास बनाए जाएं। कम से कम सर्दियों का मौसम आने से पहले लोगों के लिए व्यवस्था हो जानी चाहिए।
उड़मा के 12 परिवार जीआईसी सिंघाली में रह रहे हैं। लोगों ने बताया कि उड़मा में चाहे लोगों की सतर्कता से जनहानि नहीं हुई, लेकिन तबाही बहुत अधिक थी। कोई भी घर सुरक्षित नहीं है। बस्तड़ी के ठीक नीचे बसे उड़मा गांव तक बस्तड़ी का मलबा पहुंच रहा है। उड़मा के सभी परिवार यही कहते हैं कि वह अब अपने गांव में न तो रह सकते हैं और न वहां रहने लायक स्थिति रह गई है। गांव में किसी भी घर तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। मलबे के ढेर 30 जून की रात से नहीं हट पाए हैं।
अब जीआईसी से हटना पड़ेगा प्रभावितों को
बस्तड़ी एवं उड़मा के जितने भी परिवार जीआईसी सिंघाली और प्राथमिक विद्यालय सिंघाली में रह रहे हैं, उनको बहुत जल्द विद्यालय से हटना पड़ेगा। विद्यालय के पठन-पाठन में पहुंच रही बाधा को देखते हुए प्रशासन ने सभी प्रभावितों से कहा है कि वह सिंघाली या आसपास के इलाके में किराए का मकान तलाश लें। किराए का भुगतान सरकार करेगी। जिलाधिकारी एचसी सेमवाल के आदेश पर तहसीलदार पीसी पंत ने लोगों को इसकी जानकारी दे दी है।