नए जिले की मांग कर रहे लोगों को मुख्यमंत्री हरीश रावत नए साल का तोहफा देने का आश्वासन देकर चले गए। मुख्यमंत्री ने यह साफ नहीं किया कि यह तोहफा नए जिले का होगा या फिर कुछ और। अब लोगों का अनुमान है कि मुख्यमंत्री का इशारा डीडीहाट को नए साल पर जिले का तोहफा देने की ओर था।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को यहां आयोजित सभा में स्पष्ट रूप से तो डीडीहाट जिले के गठन की कोई बात नहीं की। लोगों की भावना को समझते हुए उन्होंने इतना जरूर कहा कि जल्दी ही कैबिनेट की बैठक में जो फैसला होगा उसमें डीडीहाट के लोगों को नए साल का बड़ा तोहफा मिल जाएगा। माना जा रहा है कि उनका संकेत नए जिले की तरफ ही था। जिले की मांग को लेकर यहां पर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है और मुख्यमंत्री तक यह बात पहुंच भी गई है। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने भी मुख्यमंत्री को पहले ही बता दिया था कि जिले के मुद्दे को लेकर यहां के लोगों की भावना जुड़ी है।
मुख्यमंत्री से लोगों ने यह उम्मीद थी कि वह शायद मंच से ही जिले के बारे में कोई एलान करेंगे। इसकी जगह मुख्यमंत्री यह कहकर चले गए कि मंत्रिमंडल की बैठक में डीडीहाट को नए साल का तोहफा दिया जाएगा। नए जिले की मांग 1960 से लगातार हो रही है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जिन चार जिलों के गठन की घोषणा की थी, उनमें डीडीहाट भी शामिल था। 2012 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो कांग्रेस ने जिलों के गठन के मामले को आयोग के हवाले कर दिया।