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परेशानी : चलते-चलते रुक गई लखनऊ और दिल्ली जाने वाली दो बस

Wed, 12 Jul 2023 10:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़-लखनऊ की बस को ठीक करता रोडवेज का तकनीकी स्टॉफ। संवाद
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो की खटारा हो चुकी बसें चलते-चलते खराब हो रही हैं। बुधवार को लखनऊ और दिल्ली के लिए जा रहीं दो बस स्टेशन से निकलते ही खराब हो गईं। रोडवेज ने लखनऊ जा रही बस को ठीक कर भेज दिया लेकिन दिल्ली वाली बस ठीक नहीं हो सकी। इधर बस स्टेशन से रोडवेज वर्कशॉप के लिए जा रही एक और बस रास्ते में ही खराब हो गई।
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बुधवार सुबह पिथौरागढ़ से लखनऊ जाने वाली बस स्टेशन से छूटते ही कुमौड़ के पास अचानक खराब हो गई। चालक-परिचालक के काफी प्रयास के बाद भी बस स्टार्ट नहीं हुई। सूचना पर तकनीकी स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर बस की जांच की तो पता चला कि फैन बेल्ट टूट गई है जिसे ठीक कर बस को लखनऊ के लिए रवाना किया गया।
इधर पिथौरागढ़ से हल्द्वानी जा रही बस भी रास्ते में अचानक इंजन ऑयल में खराबी आने के कारण बंद हो गई। इसके बाद हल्द्वानी और दिल्ली के यात्रियों को दूसरी बस से भेजा गया। खराब बस को ठीक कर बाद में हल्द्वानी के लिए भेजा गया। वहीं रोडवेज वर्कशॉप चंद्रभागा जा रही एक बस गियर बॉक्स में खराबी के कारण चंद्रभागा पुल के पास खराब हो गई। एआरएम रवि शेखर कापड़ी ने बताया कि सभी बस को जांच के बाद ही यात्रा पर भेजा जाता है। कभी-कभी तकनीकी समस्या के चलते खराब आ जाती है। पिथौरागढ़-हल्द्वानी वाली हल्द्वानी डिपो की बस को भी ठीक कर बाद में भी हल्द्वानी रवाना किया गया। वर्कशाॅप जा रही तीसरी बस को भी ठीक कर लिया गया है।
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इनसेट
अधिकांश बसें खस्ताहाल
पिथौरागढ़। 62 बेड़े वाले पिथौरागढ़ डिपो में कई बस बेहद खराब स्थिति में हैं। बसें चलते-चलते कभी भी रुक जाती हैं। वर्तमान में टनकपुर से सुबह छह बजे के बाद बस के संचालन के कारण लंबी दूरी की बसें पिथौरागढ़ काफी देरी से पहुंच रही हैं। ऐसे में वर्कशॉप में उनकी जांच समय से नहीं हो पाती है। इस कारण कई बार पुरानी बसों को भेजना पड़ता है जो रास्ते में अक्सर खराब हो जाती हैं। संवाद

चंपावत : 50 दिन बाद बेड़े से बाहर हो जाएंगी 22 बस

31 अगस्त के बाद पहाड़ी मार्गों से बाहर हो जाएंगी 22 बसें
नई बसें नहीं मिलीं तो लोहाघाट डिपो के पास रह जाएंगी सिर्फ 10 बस
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। लोहाघाट डिपो संकट में है। बसों की कमी से जूझ रहे इस डिपो की 50 दिन बाद मुसीबत और बढ़ने वाली है। मानक पूरा करने की वजह से डिपो की 22 बसें 31 अगस्त को बाहर हो जाएंगी। अगर नई बसें न मिलीं तो लोहाघाट डिपो में महज 10 बस ही बचेंगी।
लोहाघाट डिपो के बेड़े में इस वर्तमान में 32 बस हैं लेकिन एक सितंबर से ये संख्या सिर्फ 10 तक रह जाएगी। 31 अगस्त तक मानक पूरा करने वाली 22 बसें पहाड़ी मार्गों पर संचालन नहीं कर सकेंगी। ऐसी स्थिति में अगर नई बसें नहीं मिलीं तो लोहाघाट डिपो को 11 मार्गों पर बस सेवा बंद हो जाएगी। मानकों के मुताबिक पर्वतीय मार्गों पर सात लाख किलोमीटर और सात साल के बाद बस सेवा का संचालन नहीं किया जा सकता है। नई बस नहीं मिलने पर पहाड़ के मुसाफिरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इन 22 बस को टनकपुर से मैदानी क्षेत्र में चलाया जाएगा।

इनसेट
कार्यशाला में उपकरण और स्टाफ की भी कमी

चंपावत। लोहाघाट की रोडवेज कार्यशाला में भी स्टाफ की कमी है। फोरमैन और वायर मैकेनिक को छोड़ कोई भी कार्मिक स्थाई नहीं है। रोडवेज कार्यशाला वाह्य स्रोत के कार्मिकों के हवाले है लेकिन वाह्य स्रोत में भी 60 प्रतिशत पद खाली हैं। कार्मिकों के अलावा कलपुर्जों की भी कमी है। एजीएम का कहना है कि बस में बड़े काम कराने के लिए उन्हें टनकपुर या पिथौरागढ़ भेजा जाता है। संवाद
कोट

बस की स्थिति की जानकारी मुख्यालय को नियमित रूप से दी जा रही है। नई बसों के लिए भी आग्रह किया गया है। नई बस नहीं मिलने से सितंबर से कई पर्वतीय मार्गों के संचालन पर असर पड़ेगा। - केएस राणा, एजीएम, लोहाघाट।
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