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जौलजीबी मेले में तिब्बत का सामान पहुंचाने में कठिनाई

Wed, 18 Oct 2017 09:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
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मांगती और मालपा के बीच बनाया गया संकरा रास्ता - फोटो : अमर उजाला
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मालपा एवं मांगती के बीच का पैदल रास्ता घोड़ों और खच्चरों के चलने लायक न होने से इस बार तिब्बत की मंडी से लाए जाने वाले सामान को जौलजीबी मेले में पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। जौलजीबी मेला 14 नवंबर से शुरू होगा। व्यापारियों को दस नवंबर तक अपना सामान हर हाल में जौलजीबी पहुंचाना होता है। इस समय व्यापारी गुंजी में जमा सामान मजदूरों के जरिए ढुलान कर रहे हैं। गुंजी से धारचूला तक 35 किलो वजन का सामान पहुंचाने में 500 रुपये भाड़ा देना पड़ता है।
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13 अगस्त की देर रात आई आपदा के समय क्षतिग्रस्त पैदल रास्ते की मरम्मत में लोक निर्माण विभाग ने लंबा समय तो लगाया, लेकिन अब भी रास्ता कई स्थानों पर खच्चरों के चलने लायक नहीं है। यदि खच्चर पर सामान लादा जाए तो उसे संकरे रास्ते से ला पाना संभव नहीं होगा। भारत-तिब्बत व्यापार समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि रास्ता जल्दी ठीक नहीं हुआ तो जौलजीबी मेले में तिब्बत के सामान की कीमत बढ़ जाएगी और पर्याप्त मात्रा में सामान पहुंचा पाना संभव नहीं होगा। समिति के जीवन रौंकली ने कहा कि सामान ले जाने के लिए अभी खच्चरों के चलने लायक रास्ता नहीं बन पाया है।

खच्चर मजदूर कल्याण समिति ने एसडीएम के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में कहा कि मांगती से मालपा तक रास्ते को खच्चरों के चलने लायक बनाया जाए। समिति के सदस्य खड़क सिंह बुदियाल, सचिव रूप सिंह, धीरेंद्र बुदियाल ने कहा कि संकरे रास्ते से खच्चरों को ले जाना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने लोनिवि के दावे को गलत बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस रास्ते से सामान सहित खच्चर को ले जाने में सफल हो जाए तो उसे समिति इनाम दे देगी। वहीं, लोनिवि के सहायक अभियंता जीएस जनौटी का कहना है कि रास्ते को और ज्यादा सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने का कार्य जारी है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा और खच्चरों की आवाजाही होने लगेगी।
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तिब्बत के जैकेट और जूतों की ज्यादा बिक्री
जौलजीबी मेले में तिब्बत से आयात किए जाने वाले जैकेट, जूते, कंबल की बिक्री ज्यादा होती है। इसके अलावा ऊन से बने सामान का बाजार भी अच्छा रहता है। भारत-तिब्बत व्यापार समाप्त होने के तुरंत बाद जौलजीबी मेला लगता है। व्यापारी सबसे पहले सामान को जौलजीबी मेले में पहुंचाते हैं। यदि इस बार मजदूरों के जरिए सामान का ढुलान करना पड़ा तो सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी।
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