बर्फ से ढका दारमा घाटी का सीपू गांव।
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लगी भारत-चीन सीमा पर चीनी सेना 12 किलोमीटर पीछे तकलाकोट के पास अपने बंकरों में है। भारतीय सुरक्षा दल भी लिपुलेख सीमा से आठ किलोमीटर पीछे नाभीढांग के पास से ही गश्त कर रहे हैं।
पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील से चीनी सेना के पीछे हटने के बाद से भारत-चीन सीमा पर तनाव घटने की उम्मीद है। मई 2020 में लिपुलेख सीमा के पास तक चीनी सेना की नापाक हरकत से सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा दलों ने अपनी गश्त बढ़ा दी है। भारतीय वायुसेना के युद्धक विमान भी सीमा पर लगातार नजर रख रहे हैं। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से पहली बार शीतकाल में भारतीय सैनिक 14 हजार से 17 हजार फुट की ऊंचाई पर दिन-रात गश्त कर भारतीय सीमा की रक्षा कर रहे हैं। सामान्य दिनों में शीतकाल शुरू होते ही भारतीय सुरक्षा दल 12 हजार फुट की ऊंचाई वाली पोस्टों पर आकर लिपुलेख पास तक गश्त करते हैं, लेकिन आजकल लिपुलेख पास से 18 किमी पीछे से चीनी सेना अपनी सीमा में गश्त कर रही है। लिपुलेख पास पर काफी लंबे समय से चीनी सैनिक नजर नहीं आए हैं। भारतीय सुरक्षा बल लिपुलेख सीमा से आठ किमी पीछे नाभीढांग में रहकर अपनी सीमा पर लगातार गश्त कर रही है।
भारतीय सेना के उच्च अधिकारियों ने किया सीमा का निरीक्षण
पिथौरागढ़। शीतकाल में भरतीय सेना के उच्च अधिकारियों के दल ने चीन सीमा का निरीक्षण किया। धारचूला से लिपुलेख तक चीन और नेपाल सीमा गए अधिकारियों ने इस बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।