पिथौरागढ़। जिले की बंगापानी तहसील के प्रसिद्ध छिपला केदार बुग्याल पहुंचने के लिए अब ट्रैकरों को आसानी होगी। जिला पंचायत 86 लाख रुपये की लागत से ट्रैकिंग रूट का निर्माण कर रही है। इसके बनने के बाद ट्रैकरों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। जल्द ही इसका निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
समुद्रतल से 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध छिपला केदार बुग्याल तक हर कोई जाना चाहता है। यहां जाने के लिए रास्ता बदहाल होने के कारण कम ही ट्रैकर यहां तक पहुंच पाते हैं। जिला पंचायत यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने और ट्रैकरों को आकर्षित करने के लिए छह किमी लंबा ट्रैकिंग रूट बना रही है। यहां ट्रैकिंग के दौरान भनार, नाजुरीकुंड, पिंडारी ग्लेश्यर, बुग्याल और पंचाचूली का मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षिक करता है इसलिए यहां जाना हर किसी का जाना सपना रहता है।
पौराणिक मान्यता भी है छिपला केदार की
पिथौरागढ़। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे अतीत में गुप्त कैलाश (छिपा हुआ कैलाश) के नाम से जाना जाता था। हर दो साल में करीब 40 गांव के लोग यहां पूजा करने के लिए जाते हैं। इस क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीव कस्तूरी मृग, थार, भारल, हिम तेंदुआ, जंगली बकरी, पीले गले वाला नेवला, मोनाल सहित कई अन्य दुर्लभ पशु-पक्षी पाए जाते हैं। संवाद
सीमांत जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने और ट्रैकरों को आकर्षित करने के लिए ट्रैकिंग रूट बनाया जा रहा है। इसके बनने से स्थानीय चरवाहों को भी लाभ मिलेगा। - अनिल जोशी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत पिथौरागढ़।