भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार
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भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया अगले हफ्ते से शुरू हो जाएगी। इस बार ट्रेड कार्यालय ने 30 मई के बाद कोई भी आवेदन नहीं लेने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं। अब तक 158 व्यापारी और हेल्पर ट्रेड परमिट के लिए आवेदन कर चुके हैं। ट्रेड कार्यालय के पास 264 परमिट उपलब्ध हैं। इतने परमिट व्यापारियों को जरूर मिल जाएंगे।
भारत-तिब्बत व्यापार के ट्रेड सहायक पीएस कुटियाल ने बताया कि इस बार आवेदन की तिथि पहले से तय कर दिए जाने से व्यापारियों ने काफी रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि यदि परमिट जारी करने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाए तो व्यापारी तिब्बत की मंडी के लिए रवाना हो जाएंगे। व्यापारी तिब्बत की मंडी के लिए जत्थों के रूप में जाते हैं। उम्मीद है कि पहला जत्था जून मध्य तक रवाना हो जाएगा। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार जून से शुरू होता है। लिपुलेख दर्रे से होने वाले इस व्यापार में सीमांत के लोग ही ज्यादा हिस्सा लेते हैं। इसकी वजह यह है कि सीमांत के लोगों का तिब्बत व्यापार परंपरागत व्यवसाय रहा है। सीमांत के लोगों को तिब्बत में व्यापार के तरीके, वहां के लोगों के व्यवहार, बाजार की मांग आदि की पूरी जानकारी रहती है।
उपजिलाधिकारी आरके पांडे ने कहा कि इस बार आवेदन पत्र जमा करने के लिए समय सीमा का निर्धारण कर दिया गया है। इससे प्रशासन और व्यापारी दोनों को सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि ट्रेड परमिट जारी करने के लिए प्रशासन को कई दिनों तक प्रक्रिया में व्यस्त नहीं रहना पड़ेगा। व्यापारी तिब्बत के लोगों की मांग के अनुसार गजक, स्टील के बर्तन, रेडीमेड कपड़े, काफी, सुरती जैसी सामग्री को तैयार करने लगे हैं। यह सामग्री घोड़ों में लादकर तिब्बत की मंडी पहुंचाई जाएगी।
व्यापार के साथ कैलाश दर्शन भी
तिब्बत व्यापार में भाग लेने वालों को दोहरे फायदे होते हैं। उनको व्यापार के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर के दर्शन का लाभ भी मिल जाता है। तकलाकोट से कैलाश मानसरोवर की दूरी ज्यादा नहीं है। एक दिन में लोग कैलाश दर्शन कर वापस तकलाकोट आ जाते हैं। व्यापार और कैलाश यात्रा का समय एक ही रहता है।