मुनस्यारी से मर्तोलीथौड़, बलाती फार्म, भैंसियाताल समेत आसपास के इलाकों में ट्रैकिंग कर चुके पहले बैच के सदस्यों का कहना है कि ट्रैकिंग रूट सही ढंग से बनाया गया है। इसमें काफी पहले खड़ंजा डाल दिया गया है। रूट को कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि उसमें भूकटाव का असर न हो। सबसे खास बात यह है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में जैवविविधता अभी सुरक्षित है।
वहां पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां, पशु, पक्षी नजर आते हैं। अभी उच्च हिमालयी क्षेत्र के झरनों में ज्यादा पानी नहीं बढ़ा है। नदियां भी सामान्य स्तर पर बह रही हैं। ट्रैकिंग रूट में फिसलन नहीं है। ट्रैकिंग को पर्यटन से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे इस विशेष अभियान से प्रतिभागी खासे खुश हैं।
सोमवार को 30 सदस्यों वाला तीसरा दल मुनस्यारी से मर्तोलीथौड़ को रवाना हुआ। जबकि प्रथम बैच के लोग सोमवार को खलियाटॉप के पास स्थित भैंसियाताल पहुंच गए। यह इलाका खलियाटॉप के एकदम नजदीक है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, यूथ हॉस्टल ऑफ इंडिया, कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से कराए जा रहे इस आयोजन में कुल 700 लोग भाग ले रहे हैं। तीसरे बैच में 12 महिलाओं समेत कुल 30 लोग हैं। इनमें कर्नाटक के 14, महाराष्ट्र के 8, तेलंगाना के 3, हरियाणा, यूपी के 2-2, गुजरात का 1 ट्रैकर शामिल हैं।
यूथ हॉस्टल ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युधिष्ठिर शर्मा ने बताया कि ट्रैकरों में कई लोग हर स्थान की डायरी तैयार कर रहे हैं। वह इन स्थानों में मिलने वाली वनस्पति, पशु, पक्षी का ब्योरा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर बैच में अधिक से अधिक 30 लोग शामिल होंगे। कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से ट्रैकर यहां पहुंचे हैं। वह इस स्थान की विशेषता की जानकारी अपने क्षेत्र के लोगों को देंगे।
दुर्लभ चित्र इंटरनेट पर अपलोड होंगे
मुनस्यारी में कई खूबसूरत बुग्याल, झरने, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान हैं। इन स्थानों के चित्र तथा वीडियो भी ट्रैकर तैयार कर रहे हैं। इनको बाद में इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा ताकि दुनिया भर के लोग इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकें। यूथ हॉस्टल ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युधिष्ठिर शर्मा का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने पहले ही मुनस्यारी के बारे में इंटरनेट से जानकारी हासिल करने के बाद ही इस आयोजन में भाग लिया।