धारचूला तहसील के कालिका में लग रहा आइडिया का मोबाइल टावर
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वर्ष 2016 में चले अमर उजाला के अभियान में सबसे बड़ी उपलब्धि सीमांत धारचूला क्षेत्र में मोबाइल सेवा को लेकर रही। यहां की समस्या बार-बार उठाने का असर यह हुआ कि दिसंबर प्रथम सप्ताह में ही धारचूला क्षेत्र में निजी कंपनी के टावर लगाने का काम शुरू हो गया।
अमर उजाला ने 26 नवंबर के अंक में ‘अपनों का हाल जानने के लिए नेपाली सिम का सहारा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर धारचूला तहसील में संचार सेवाओं की बदहाली को सामने लाने का प्रयास किया था। खबर में यह अहम तथ्य भी दिया गया था कि धारचूला क्षेत्र में 15 हजार लोग नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं। उसके बाद छापी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख किया था कि आपदा के समय भी नेपाली सिम का सहारा लिया जाता है। देश में नोटबंदी लागू होने, डिजिटल कैश प्रणाली को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच धारचूला तहसील की संचार अव्यवस्था की समस्या को उजागर किया था।
इन खबरों का केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने गंभीरता से संज्ञान लिया और संचार मंत्री से बात करने के बाद धारचूला के लिए आइडिया, बीएसएनएल और रिलायंस कंपनी के कई टावरों को मंजूरी दी। इनमें से कालिका, छारछुम, बलुवाकोट, धारचूला नगर में टावर लगाने का काम शुरू हो गया है, जबकि दारमा, व्यास, चौदांस घाटी के कोटेरा, पाथर, रांथी, ठाणीधार, दर में टावर लगाए जाएंगे। इनकी सामग्री मिल चुकी है। टम्टा का कहना है कि मार्च तक सभी स्थानों पर टावर लग जाएंगे और लोगों को संचार की सुविधा मिलने लगेगी।
संचार सेवाओं में सुधार के लिए लंबे समय तक आंदोलन की बागडोर संभालने वाले धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू को भी यहां दौरे के समय समस्या की जानकारी दी गई थी। वह कहते हैं कि वर्ष 2000 में जब बीएसएनएल की मोबाइल सेवा के लिए आंदोलन हुआ तब भी अमर उजाला ने उनकी आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का प्रयास किया। अभी भी जब निजी कंपनियों की संचार सेवा शुरू करने की मांग उठी तो अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी थी। वह कहते हैं कि अब संचार की समस्या समाधान की ओर है। जल्दी ही धारचूला के वंचित इलाकों में भी मोबाइल की घंटी घनघनाने लगेगी।