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बेहाल है पर्यटन नगरी मुनस्यारी

Thu, 21 Jan 2016 10:19 PM IST
प्रमोद द्विवेदी /अमर उजाला,मुनस्यारी /पिथौरागढ़
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कुदरत ने मुनस्यारी को पर्यटन नगरी के रूप में जितना कुछ होना चाहिए, वह सब कुछ दिया है, लेकिन शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है, जिस कारण अब तक यहां एक अदद नगर पंचायत अस्तित्व में नहीं आई है, हालांकि इसकी घोषणा 15 माह पहले हो चुकी है।
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मुनस्यारी तक अब हिमालय दर्शन हेली सेवा शुरू हो गई है। बर्ड वाचरों की गतिविधि यहां होने लगी है। खलियाटॉप और बेटुलीधार में स्नो स्कीइंग कराई जाती है। हर सीजन में यहां पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मुनस्यारी को नगर पंचायत का दर्जा देने का एलान अक्तूबर 2014 में हो गया था। तब ऐसा लगा कि शायद मुनस्यारी के दिन भी फिरने लगेंगे।
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यहां की मुख्य समस्या सफाई की है, लेकिन नालियों से गंदे पानी के निकास के लिए स्थानीय प्रशासन के स्तर से कोई कदम नहीं उठाए गए, यदि नगर पंचायत गठित हो जाती तो नगर के आंतरिक रास्तों की मरम्मत हो जाती, सफाई का सही इंतजाम हो जाता और शहरी विकास की मद से आने वाली धनराशि का उपयोग नगर के विकास में होता।

क्या है नगर पंचायत के गठन में अड़ंगा
नगर पंचायत मुनस्यारी के लिए जब परिसीमन किया गया तो उसमें तल्ला घोरपट्टा, मल्ला घोरपट्टा, जैंती और नानासैम गांवों को भी शामिल कर दिया गया था, लेकिन इन गांवों के लोग नगर पंचायत में शामिल नहीं होना चाहते। इनके विरोध के चलते नगर पंचायत अब तक अस्तित्व में नहीं आ पाई है

नहीं हो पा रहा धनराशि का उपयोग
प्रदेश के शहरी विकास विभाग ने नगर पंचायत मुनस्यारी के नाम पर दो करोड़ रुपये आंतरिक नालियों के निर्माण और पांच लाख रुपये आफिस के फर्नीचर के लिए जारी कर दिए हैं, लेकिन नगर पंचायत का गठन न हो पाने के कारण इस राशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

बाधा को तत्काल दूर किया जाए
मुनस्यारी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र देवा का कहना है कि नगर पंचायत के गठन में आ रही बाधा को तत्काल दूर किया जाए, यदि सरकार के सामने कोई अन्य अड़चन है तो उसका भी समाधान होना चाहिए। वह कहते हैं कि पर्यटन नगरी के विकास के लिए नगर पंचायत बेहद जरूरी है।

विरोध वालों को शामिल न किया जाए
मुनस्यारी निवासी चंद्र सिंह लसपाल कहते हैं कि जो गांव के लोग नगर पंचायत में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं, उनके गांव को शामिल न किया जाए और नगर के शेष हिस्से को नगर पंचायत का दर्जा देकर कामकाज शुरू किया जाए। वह कहते हैं कि नगर की जनता के हित में अब इसमें ज्यादा देरी ठीक नहीं है।
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