धारचूला के खोतिला में निरीक्षण करते भारत-नेपाल के अधिकारी
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भारत-नेपाल के अधिकारियों ने पिछले साल हुए भूस्खलन से नेपाली क्षेत्र के लिए खतरा बने धारचूला के क्षेत्र का जायजा लिया। इस दौरान भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा कार्य और नदी में जमा बोल्डरों को तोड़ने पर सहमति बनी। नेपाल के इंजीनियरों ने भारतीय क्षेत्र में सुरक्षा के उपाय करने के दावों को गलत बताया।
बुधवार को भारत और नेपाल के प्रशासनिक अधिकारियों ने भूस्खलन प्रभावित खोतिला का दौरा किया। भारतीय दल में शामिल सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता चंद्रशेखर आर्या ने बताया कि पिछले वर्ष विभाग ने जेसीबी से कई टन मलबा हटाया। नेपाल के स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। इस पर नेपाल के इंजीनियर सुशील देवकाटा ने कहा कि मलबा हटाया ही नहीं गया हैं। केवल एक-दो दिन कार्य कर खानापूर्ति कर दी गई। कहा कि यदि सुनियोजित ढंग से मलबा हटाया गया होता तो नेपाली क्षेत्र को खतरा नहीं होता। नेपाल के सहायक जिलाधिकारी शिवराज जोशी ने कहा कि एक महीने के भीतर सुरक्षा कार्य नहीं हुए तो उसके बाद जलस्तर बढ़ जाएगा, फिर नदी में काम करना संभव नहीं होगा।
धारचूला एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि नेपाल और भारत दोनों देशों की सीमा की समान रूप से सुरक्षा के उचित प्रबंध करने होंगे। बरसात में महाकाली नदी का जल स्तर बहुत बढ़ जाता है। कहा कि नदी के किनारे पहाड़ी पर लटके बोल्डरों को तोड़ना होगा। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भूस्खलन क्षेत्र में सुरक्षा कार्य करने के साथ ही नदी में गिरे बोल्डरों को तोड़ने के निर्देश दिए। दोनों देशों के अधिकारियों में कई मुद्दों पर सहमति बनी, जिससे महाकाली के प्रवाह में आई रुकावट दूर होने की उम्मीद जगी है। नेपाल पत्रकार संघ के अध्यक्ष शंकर धामी, भोजराज जोशी, कमल कुमार, बासुदेव सहित कई लोगों ने भी सुझाव दिए।