पहाड़ियों में जमा प्लास्टिक कचरे को एकत्र करता युवा। फाइल फोटो।
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पिथौरागढ़। प्लास्टिक इंसानों की ही नहीं पर्वतों की सेहत भी बिगाड़ रहा है। पर्यटकों और ट्रेकरों के छोड़े गए प्लास्टिक कचरे से जैव विविधता को खतरा होने के कारण पहाड़ों की खूबसूरती पर भी दाग लग रहा है। पहाड़ियों को कूड़ा मुक्त करने के लिए आइस संस्था के सदस्य भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के साथ मिलकर पिछले तीन सालों से सफाई अभियान चला रहे हैं।
जब से साहसिक पर्यटन बढ़ा है खूबसूरत पर्वत प्लास्टिक कचरे से पट गए हैं। ट्रेकर और पर्यटक सामान के लिए अपने साथ प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथिन ले जाते हैं। उपयोग के बाद इस कचरे को वहीं पर छोड़ देते हैं। पहाड़ियों और खूबसूरत बुग्यालों में प्लास्टिक कचरा बिखरने से वहां पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। यहां तक कि जैव विविधता भी खतरे में पड़ने लगी है। प्लास्टिक कचरे के बोझ से कराह रहे पर्वतों को बचाने के लिए आइस संस्था के सदस्य भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के साथ मिलकर वर्ष 2017 से काम कर रहे हैं। संस्था के सचिव वासु पांडेय ने बताया कि वर्ष 2017 से लगातार प्रमुख पर्यटन स्थलों वाली पहाड़ियों में जाकर प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर नीचे लाया जाता है। इसके बाद इसका निस्तारण किया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में मुनस्यारी के खलिया और पिंडर क्षेत्र में यह अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में भी पर्वतों में जमा प्लास्टिक कचरे को नीचे लाकर निस्तारित किया गया। वासु पांडेय ने बताया कि सफाई कार्यक्रम के साथ ही उनकी संस्था स्कूलों और गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करती है। इसके अलावा प्लास्टिक की खाली बोतलों के प्रयोग के बारे में बताया जाता है। ताकि प्लास्टिक कचरे का सदुपयोग हो सके। ब्यूरो