जौलजीबी इसी स्थान पर लगता है अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला। संवाद
पिथौरागढ़। अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेले में इस बार भी चीन का सामान नहीं दिखेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के चलते चार साल से व्यापारिक गतिविधियां ठप हैं। कोविड के बाद भी इस पर असर पड़ा है। पिछले साल भी सिर्फ भारत और नेपाल की ही वस्तुएं नजर आई थीं।
जौलजीबी मेले का सबसे अधिक आकर्षण तिब्बत से लाई गईं वस्तुएं रहती थीं। भारतीय मंडी गुंजी से भारतीय व्यापारी चीन से आयातित सामान सीधे जौलजीबी मेले में पहुंचाते थे। इनमें जैकेट, शर्ट, चंवर गाय की पूंछ, जूते आदि प्रमुखता से शामिल रहते थे। तिब्बत चीन व्यापार से आयातित यह सामान मेलार्थियों की पहली पसंद होती थी। माना जा रहा है कि इस बार जौलजीबी मेले में लगे स्टाल में उच्च हिमालयी जड़ी बूटी और स्थानीय काष्ठकला के स्टाल आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
हुमला-जुमला के घोड़े भी नहीं दिखते मेले में
पिथौरागढ़। जौलजीबी मेले में नेपाल में बिकने आने वाले हुमला-जुमला के घोड़े भी आकर्षण का केंद्र रहते थे। नेपाल में काली नदी किनारे घोड़ों का बाजार लगता है। इन घोड़ों के खरीदार भारतीय होते हैं। कुमाऊं मंडल के विभिन्न स्थानों से घोड़े खरीदने के लिए लोग पहुंचते हैं। घोड़ों को काली नदी तैराकर भारत लाया जाता है। कुछ सालों से ये घोड़े भी मेले में नहीं दिखाई देते हैं। संवाद
फोटो विवरण-02पीटीएच 20पी- जौलजीबी इसी स्थान पर लगता है अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला। संवाद