पिथौरागढ़। नगर के लिए बन रही आंवलाघाट पेयजल योजना में तीसरे वैल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इससे मार्च में पानी मिलने की उम्मीद है, लेकिन बारहमासी सड़क के निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त घाट पेयजल योजना से इस गर्मी में भी पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। जल संस्थान को एनएच ने योजना के पुनर्निर्माण के लिए आधा पैसा भी दे दिया है लेकिन जल संस्थान योजना का पुनर्निर्माण बहुत सुस्त गति से कर रहा है। इसका खामियाजा लोगों को गर्मियों में भुगतना पड़ सकता है।
सीमांत जिले में करीब 75 करोड़ की लागत से आंवलाघाट पेयजल योजना का निर्माण किया गया है। 12 एमएलडी की इस योजना से वर्तमान में नगर को छह एमएलडी पानी मिल रहा है। जल निगम नगर को तीन एमएलडी पानी और मिले इसके लिए आंवलाघाट में नये कुएं का निर्माण कार्य कर रहा है। उसने तीसरे कुएं का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि मार्च से तीसरे कुएं से नगर को पानी मिलने लगेगा।
नगर को नौ एमएलडी पानी मिलने से पेयजल दिक्कत कुछ हद तक कम हो पाएगा। ऑलवेदर सड़क के निर्माण के दौरान पिथौरागढ़ के लिए बनी छह एमएलडी की घाट पेयजल योजना जगह-जगह ध्वस्त हो गई थी। एनएच ने इसके पुनर्निर्माण के लिए जल संस्थान को करीब तीन करोड़ 33 लाख रुपये दिए हैं, लेकिन जल संस्थान योजना के पुनर्निर्माण का कार्य बेहद सुस्त गति से कर रहा है। इसके चलते योजना का पुनर्निर्माण का कार्य समय से पूरा हो पाना संभव नहीं है। लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
1980 में 454 मीटर से 1575 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचाया गया था पानी
पिथौरागढ़। वर्ष 1980 में निर्मित घाट पंपिंग पेयजल योजना को एशिया की सबसे बड़ी पंपिंग पेयजल योजना बताया जाता है। घाट में 454 मीटर की ऊंचाई पर बहने वाली सरयू नदी से पानी पंप कर चार पंपों के माध्यम से पानी 1575 मीटर की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ के हनुमान मंदिर पंप तक पहुंचाया गया।
आंवलाघाट के तीसरे कुएं का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। मार्च तक तीसरे कुएं से पानी मिलने लगेगा। अभी कुएं में अंतिम चरण के कार्य पूरे किए जा रहे हैं।
- आरएस धर्मशक्तू, ईई जल निगम पिथौरागढ़।
बारहमासी सड़क के निर्माण के दौरान घाट पेयजल योजना ध्वस्त हो गई थी। एनएच ने इसके पुनर्निर्माण के लिए आधा पैसा दे दिया है। योजना का काम तेज गति से किया जा रहा है। शीघ्र ही इस पेयजल योजना से पानी मिलने लगेगा।
- अशोक कुमार, ईई जल संस्थान पिथौरागढ़।