पिछले दिनों पिथौरागढ़ में आयोजित कवि सम्मेलन में अपने साहित्य के साथ नेपाली साहित्यकार। संवाद
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ के ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय में अब पाठक नेपाली साहित्य भी पढ़ सकेंगे। पिछले सप्ताह पिथौरागढ़ में आयोजित पहले भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय काव्योत्सव के मौके पर नेपाल से आए साहित्यकारों ने 50 से अधिक पुस्तकें प्रदान की हैं। इतनी ही पुस्तकें भारतीय साहित्यकारों ने नेपाल के साहित्यकारों को प्रदान की हैं। पुस्तकों के आदान-प्रदान से दोनों देशों के नागरिक भारत और नेपाल के साहित्यिक संबंधों से परिचित हो सकेंगे।
पिथौरागढ़ के न्यू बजेटी में सेवानिवृत शिक्षक और साहित्यकार डॉ.पीतांबर अवस्थी के निजी प्रयासाें से स्थापित इस पुस्तकालय में 50 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। सुदूर पश्चिम नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं इतिहासकार राजेंद्र सिंह रावल की प्रसिद्ध पुस्तकें डोटी का इतिहास, मानसखंड संहिता, नेपाली शब्द सागर, नेपाली रामायण, कैलाश पांडेय की पुस्तक एकलव्य को देशमा, गणेश नेपाली का गजल संग्रह एकलव्य के साथ ही कृष्ण सिंह की पुस्तक फूल को प्रहार समेत नेपाली साहित्य, धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी।
पुस्तकालय के निदेशक डाॅ. पीतांबर अवस्थी ने कहा कि विदेशी साहित्यकारों ने नेपाल साहित्य पुस्तकालय को प्रदान कर एक नई परंपरा को जन्म दिया है। इससे दोनों देशों के लोगों को एक दूसरे के रीति रिवाज, परंपरा के साथ ही साहित्यिक संबंध मजबूत होंगे। डाॅ. अवस्थी ने कहा कि नेपाली भाषा भारत की अनुसूची में शामिल है। संवाद