पिथौरागढ़। जिले के सरकारी अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है। जिले भर के अस्पतालों में 115 पदों पर न वार्ड बॉय है न ही वार्ड आया। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। सबसे बुरे हाल जौलजीबी, मदकोट, मुनस्यारी, थल सहित दूरस्थ अस्पतालों के हैं। यहां अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को स्वयं अस्पताल परिसर की साफ-सफाई करनी पड़ती है।
सीमांत जिले के अस्पतालों में लंबे समय से वार्ड बॉय, वार्ड आया और स्वच्छक के 115 पद रिक्त हैं। चिकित्सा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। जिले में चतुर्थ श्रेणी वार्ड बॉय के 171 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष जिले में 46 पद रिक्त हैं। अस्पतालों की साफ-सफाई हो सके इसके लिए जिले भर में 75 पद स्वच्छक के स्वीकृत हैं।
बावजूद इसके 63 पदों पर तैनाती नहीं हो पाई है। अस्पतालों में वार्ड बॉय और आया की भूमिका महत्वपूर्ण होती है जबकि वार्ड आया के भी छह पद रिक्त चल रहे हैं। इनकी तैनाती नहीं होने पर अस्पतालों में भर्ती मरीजों के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक बुरे हाल जौलजीबी, मुनस्यारी, थल सहित जिले के दूरस्थ अस्पतालों के हैं।
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चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की कमी से कुछ अस्पतालों में दिक्कतें आ रही है। इसके लिए शासन से पत्राचार किया गया है। कर्मचारियों की तैनाती के लिए प्रयास चल रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही जिले भर के अस्पतालों में चतुर्थ कर्मचारियों की तैनाती हो जाएगी। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ पिथौरागढ़।