धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन और नेपाल सीमा पर स्थित धारचूला तहसील में कुल 62 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें आधे से अधिक ग्राम पंचायतों के कई तोक में एक भी सरकारी मोबाइल टावर नहीं है। इन गांवों के लोगों को नेपाली नेटवर्क के भरोसे ही रहना पड़ता है।
सीमांत के चौदास घाटी में 14 गांवों में ठानिधार और नारायण आश्रम में कुछ साल पहले ही बीएसएनएल का मोबाइल टावर लगा है। जिसका लाभ पांगृ, रिमझिम, रोतो, हिमखोला और सोसा आदि कुछ गांवों के लोग भी लाभ उठाते है। शेष सिर्दांग, सिर्खा, रूंग, गाला, जिप्ति, सिमखोला, तांकुल, पांगला और जयकोट आदि 9 ग्राम पंचायतों में कोई भी सरकारी संचार व्यवस्था नहीं है। ये 9 गांव तवाघाट से नजंग के बीच के हैं और आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। यहां हर साल बरसात में कोई ना कोई छोटी बड़ी आपदा आती रहती है।
मानसून काल में इन गांवों के लोगों को सूचना का आदान प्रदान करने के लिए नेपाली सिम का सहारा लेना पड़ता है। इन गांवो में कुछ साल पहले नारायण आश्रम में मौजूद टावर का सिग्नल आता था। कुछ समय पूर्व सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने सिग्नल नेपाल की ओर जाने पर सुरक्षा की दृष्टि से बीएसएनएल ने मोबाइल टावर की रेंज कम कर दी थी, जिससे इन 9 गांवों के तोकों में सिग्नल आने बंद हो गए। इससे लोगों में नाराजगी है।
लोगों की मांग है कि नारायण आश्रम के बीएसएनएल मोबाइल टावर की रेंज बढ़ाई जाए। नेपाली नेटवर्क का सिग्नल जौलजीबी से लेकर व्यास घाटी तक आता है। इस पर सुरक्षा विभाग को ध्यान देना चाहिए। लोगों का कहना है कि तवाघाट से लेकर व्यास घाटी के लोगों के साथ सरकारी कर्मचारी भी संचार के लिए नेपाली नेटवर्क का सहारा लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
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तवाघाट से ऊपर व्यास घाटी की और जिप्ति, सिर्खा, मालपा, बुदि, गर्ब्यांग, गुंजी, कुटी और दारमा घाटी की और खेत, सुवा, सोबला, नांगलिंग, बालिंग, दांतु और सीपू आदि गांवों के मोबाइल टावर लगाने के लिए इस्टीमेट भेजा है। सरकार से स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। -जोतेंद्र सिंह नेगी, बीएसएनएल जूनियर टेलीकॉम अधिकारी धारचूला।
बोले सीमांत के लोग-
हमारे जिप्ति, गाला और गर्बाधार आदि जगहों में कोई भी सरकारी संचार व्यवस्था नहीं है। हम लोग कई साल से प्रशासन को सूचना देने और अपने रिश्तेदारों से बात करने के लिए नेपाली नेटवर्क का सहारा लेने को मजबूर हैं। सरकार ने जिप्ति में सैटेलाइट फोन सेट दिया है, लेकिन 12 रुपये प्रति मिनट आउटगोइंग और इनकमिंग रेट ज्यादा होने में अभी स्थिति साफ नहीं है। शीघ्र गांव के साथ बैठक करके सैटेलाइट फोन सेट लेने का विचार किया जाएगा। -धर्मेंद्र सिंह प्रधान जिप्ति
हमारे गांव के कई तोकों में संचार व्यवस्था नहीं है। लोगों को नेपाली नेटवर्क का सहारा मजबूरी में लेना पड़ता है। आज दुनिया फाइव-जी की और है, लेकिन सीमांत के कई गांवों में टू-जी की व्यवस्था भी नही है। सरकार को सीमांत के लोगों की संचार व्यवस्था के साथ-साथ मेडिकल वैन की सुविधा देने की कोशिश करनी चाहिए। -नंदा बिष्ट, समाज सेविका, तांकुल
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हमारे चौदास घाटी की 5 ग्राम पंचायतो में कोई भी सरकारी संचार की व्यवस्था नहीं है। मेरी प्रशासन से मांग है कि नारायण आश्रम के मोबाइल टावर की रेंज बढ़ाई जाए, जिससे कुछ तोकों के लोगों को लाभ मिल सके। - मुक्ता ह्यांकी, क्षेत्र पंचायत सदस्य पांगू धारचूला
तवाघाट से लेकर व्यास घाटी के लगभग 20 ग्राम पंचायतो में अपनी सरकारी संचार की व्यवस्था नहीं है। बिजली की आंखमिचौली ज्यादा है। मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था होती तो हम लोग मोबाइल पर देश विदेश की खबर तो सुन लेते और नेपाली नेटवर्क की निर्भरता भी खत्म हो जाती। सरकार शीघ्र ही मोबाइल टावर लगाने की व्यवस्था करे।
- प्रियंका गुंज्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य, व्यास घाटी धारचूला