मुवानी(पिथौरागढ़)। मुवानी रामलीला के अंतिम दिवस अहिरावण के प्रसंग से लीला की शुरुआत हुई। भेष बदलकर अहिरावण रामदल में पहुंचता है। वह नींद में ही राम-लक्ष्मण का हरण कर पाताल लोक ले जाता हैं।
राजकुमारों की खोज में हनुमान पाताल लोक पहुंचते हैं। और मकरध्वज को बंदी बनाने के बाद अहिरावण का वध करते हैं। अंत में राम और रावण का युद्ध होता है। युद्ध में तमाम युक्तियों से भी रावण के नहीं मरने के बाद विभीषण राम को रावण के नाभि में अमृत का रहस्य बताते हैं। रहस्य खुलने के बाद राम रावण की नाभि में वार करते हैं और इस तरह रावण का अंत होता है। विभीषण को लंका का राजकाज सौंपकर राम लक्ष्मण और सीता के साथ अयोध्या लौटते हैं।
अयोध्या में राम के स्वागत में जगह-जगह दीप जलाए जाते हैं और अयोध्या नगरी राम के स्वागत में जश्न मनाती है। राम को अयोध्या का राजसिंहासन सौंपा जाता है। राजा राम का राजतिलक होता है। शनिवार को रामलीला मैदान में हवन यज्ञ के साथ तिल पात्र का आयोजन किया गया। इसमें कलाकारों ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां हारमोनियम मास्टर श्यामाचरण उप्रेती, तबला वादक श्याम राम, कमेटी के अध्यक्ष रमेश बम, संजय वर्मा, त्रिलोक सिंह बोरा, दीपक कार्की, विक्रम कठायत, कुंवर सिंह, वक्ता मैनेजर भुवन चंद्र जोशी मौजूद रहे।