संचार सेवा ठप रहने से पुलवामा में आतंकी हमले के बाद अपनों की कुशलता नहीं मिल पाने से झूलाघाट के लोग सड़क पर उतर आए। भारत और नेपाल को जोड़ने वाले पुल की तालाबंदी को लेकर इनकी सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प हुई। पुल पर करीब तीन घंटे के जाम, धरना और प्रदर्शन के बाद संचार सेवा बहाल हुई तो लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
यहां के कानड़ी, सीमू, गेठिगाड़ा और बलतड़ी के कई जवान जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। बृहस्पतिवार को पुलवामा हमले की सूचना के बाद नेटवर्क न होने से लोग अपनों की कुशलता की जानकारी के लिए परेशान रहे। शुक्रवार को इनका गुस्सा फूट पड़ा। पहली बार किसी विभाग के खिलाफ लोग सड़क पर उतर आए। पुराने रामलीला मैदान में सभा के बाद प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में झूलापुल तक तालाबंदी के लिए जा पहुंचे। यहां पुलिस पहले से ही मौजूद थी। यहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का मुक्की हुई।
इस दौरान पुल पर दोनों देशों के यात्रियों के वाहनों की लंबी लाइन लग गई। एसडीएम एसके पांडे, दूरसंचार विभाग के जेटीओ गौरव कन्याल ने लोगों से बातचीत की । लोगों ने नेटवर्क तुरंत सही करने, क्षेत्र के सभी टावरों में नई मशीनें लगाने, नेपाल की तरह सेटेलाइट टावर लगाने की मांग की। एसडीएम ने सभी मांगों को जिलास्तर पर पूरा करवाने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन करने वालों में व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी, क्षेत्र पंचायत सदस्य विक्रम महर, प्रधान मजिर कांडा सुरेंद्र आर्या मौजूद रहे।
महिलाएं भी प्रदर्शन में रहीं आगे
अपनों से एक माह तक बात न करने का दर्द कैसा होता है। इसका नजारा दूरसंचार विभाग के खिलाफ हुए प्रदर्शन में दिखाई दिया। प्रदर्शन में 70 वर्षीय जानकी देवी, 66 वर्षीय बसंती देवी, रामा देवी, जानकी कापड़ी, किरन भट्ट, मीना देवी, शकुंतला भट्ट, रेखा भट्ट, रेनू आदि मौजूद थीं।
प्रदर्शन के एक घंटे बाद सेवा हुई दुरुस्त
दूरसंचार विभाग की कार्यप्रणाली पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं। एक माह से सीमांत क्षेत्र के बड़े हिस्से में बीएसएनएल सेवा खराब है। कई बार के आंदोलन के बाद भी किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के एक घंटे के बाद ही संचार सेवा ठीक हुई।