धारचूला (पिथौरागढ़)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत लोकभाषा रं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विकसित सहायक पुस्तकों के परिमार्जन के साथ ही शब्दकोष निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में रं भाषा के शब्दों को भी अंतिम रूप प्रदान किया जाएगा।
मंगलवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज धारचूला में कार्यशाला शुरू हुई। संयुक्त निदेशक एससीईआरटी प्रदीप रावत और खंड शिक्षा अधिकारी डीएल आर्य ने दीप प्रज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
10 से 12 दिसंबर तक चलने वाली तीन दिवसीय कार्यशाला में एससीईआरटी ने कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए विकसित सहायक पुस्तकों का परिमार्जन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य में बोली जाने वाली लोक भाषाओं के शब्द कोश का भी निर्माण एससीईआरटी उत्तराखंड में चल रहा है।
वक्ताओं ने बताया कि कार्यशाला में रं भाषा के शब्दों को भी अंतिम रूप प्रदान किया जाएगा। कार्यशाला में एससीईआरटी उत्तराखंड देहरादून के संयुक्त निदेशक प्रदीप रावत के साथ साथ पाठ्यक्रम विभाग से सोहन सिंह नेगी, डॉ. शक्ति प्रसाद सेमल्टी और एनईपी प्रकोष्ठ से रवि दर्शन तोपाल, मनोज किशोर बहुगुणा, सचिन नौटियाल कार्यशाला का समंवयन कर रहे हैं। डायट डीडीहाट पिथौरागढ़ से राजेश पाठक भी कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं।
रं संग्रहालय के कृष्णा गर्ब्याल ने दिए सुझाव
धारचूला। कार्यशाला में तीनों घाटियों व्यास, दारमा तथा चौदास से शिक्षक शिक्षिकाएं प्रतिभाग कर रही हैं। इनमें ब्लॉक समन्वयक जगदीश चंद, आभा फकलियाल, हिरंदा कुटियाल, रंजनी नपलच्याल, गिरधर सिंह रौतेला, संजय नगन्याल, नारायणी एतवाल, पूनम ग्वाल, त्रिभुवन गर्ब्याल, हेमवती गर्खाल, रेणुका फिरमाल, राजेश्वरी सोनाल, जस्ता तितियाल सहित 30 शिक्षकों की टीम प्रतिभाग कर रही है।