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चर्मा नदी में पट रहा नगर का कूड़ा

Wed, 12 Apr 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
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डीडीहाट में चर्मा नदी में मिल रही गंदगी - फोटो : अमर उजाला
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चर्मा नदी भनड़ा, ननपापू, चिरकटिया के बांज के जंगलों से निकलने वाले स्रोतों से तैयार होती है। इस नदी का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही यह लोगों के लिए जीवनदायिनी भी रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह नदी प्रदूषण का शिकार हो गई है। डीडीहाट नगर की 50 फीसदी गंदगी और कूड़ा इसी नदी में मिल रहा है। चर्मा नदी के किनारे कई मंदिर हैं। हाट और धौलेत गांव के खेतों के लिए सिंचाई का पानी इसी नदी से जाता है। नारायणनगर के लिए लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना चर्मा से ही बनी है।
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चर्मा का पानी कम हो रहा है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। नदी के किनारे कूड़े से पटते जा रहे हैं। कई स्थानों पर सीवर की गंदगी नदी में मिल रही है। दुर्भाग्य की बात है कि अब तक कभी इस नदी में न तो कोई सफाई अभियान चलाया गया और न सीवरेज रोकने के लिए कोई ट्रीटमेंट ही किया गया। बताते हैं कि पहले नदी में गर्मियों में भी लबालब पानी भरा रहता था, लेकिन अब बारिश के समय भी नदी में पहले जैसा उफान नहीं दिखता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से डीडीहाट में शहरीकरण की होड़ मची, तब से चर्मा नदी के दुर्दिन शुरू हो गए। अब चिंता इस बात की है कि आने वाले समय में नदी का अस्तित्व ही समाप्त न हो जाए। नदी में पानी का वेग लगातार कम हो रहा है। नदी के किनारे बसे गांव के लोगों का कहना है कि सफाई के लिए उनके पास संसाधनों की भारी कमी है। 
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सीवर निस्तारण के उपाय होंगे
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी का कहना है कि चर्मा नदी में सीवर की गंदगी न जाए, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीवर निस्तारण के लिए शीघ्र योजना बनाई जा रही है, जो लोग नदी में गंदगी फैला रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गंदगी फैलाने वालों को हिदायत दें
समाजसेवी प्रकाश बोरा का कहना है कि नदी में गंदगी फैलाने वालों को सख्त हिदायत दी जानी चाहिए। साथ ही उनको कानून का भय भी दिखाया जाए। इससे नदी को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। वह कहते हैं कि शहर की गंदगी का सामना गांव के लोग क्यों करें। 

अज्ञानता के कारण हो रही समस्या
समाजसेवी धन सिंह कफलिया का कहना है कि लोग अज्ञानता के कारण ही नदियों को गंदा करते हैं। यदि लोगों को इस तरह की गलती में कानून का डर होता तो शायद लोग घरों का सीवर पवित्र नदियों में नहीं छोड़ते। अब लोगों को सबसे पहले जागरूक करने की जरूरत है। 
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