देश के गृहमंत्री, यूपी के पहले मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय गोविंद बल्लभ पंत के पूर्वजों और स्वाधीनता सेनानी स्वर्गीय माया दत्त पंत का गांव कुनल्ता भी खाली होता जा रहा है। गांव तक सड़क बनने के बाद भी लोगों का यहां से अन्यत्र जाकर बसने का क्रम नहीं थमा है। इससे गांव खाली होते जा रहा है। अव्यवस्थाओं से खिन्न होकर इस साल की शुरुआत में सेनानी माया दत्त पंत के पौत्र हेमंत पंत भी गांव छोड़कर हल्द्वानी शिफ्ट हो गए हैं।
वर्ष 1991 के बाद से लोग सेनानियों के इस गांव को छोड़कर अन्यत्र जाने लगे। गांव के लोग एक-एक कर हरिद्वार, लखनऊ, हल्द्वानी, अल्मोड़ा जा बसे। वर्ष 2006 में कुनल्ता सड़क से जुड़ा, लेकिन 10 साल बाद भी सड़क पर डामर नहीं हुआ है। जूनियर हाईस्कूल के उच्चीकरण की घोषणा के बाद भी हाईस्कूल में उच्चीकरण नहीं हुआ है। स्वास्थ्य की उचित सुविधा नहीं है। ग्राम प्रधान कल्पना पंत कहती हैं कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत के पूर्वजों का कुनल्ता से नाता रहा है। पंत परिवार के नाम पर आज भी गांव में जमीन दर्ज है।
बताती हैं कि गांव से चंद्रशेखर पंत का परिवार हरिद्वार, गोविंद पंत, भुवन चंद्र नियोलिया, महेश पंत, जगदीश चंद्र जोशी, रमेश सूंठा, मनोज नियोलिया, पूरन लाल, बसंत राम, दानी राम, नंद किशोर पंत समेत कई परिवार हल्द्वानी में बस गए हैं। लखनऊ, अल्मोड़ा समेत अन्य शहरों में भी गांव के लोग बसे हैं। प्रधान कहती हैं सेनानी के पौत्र का गांव से चला जाना गांव के लिए सदमे जैसा है। कभी 85 परिवारों से गुलजार कुनल्ता में आज महज 15 परिवार रह गए हैं। इन हालात में गांव कब पूरी तरह खाली हो जाएगा, कहा नहीं जा सकता।
रहने लायक सुविधा तो दो
क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपा देवी, ग्रामीण गोविंद पंत, रमेश नियोलिया, नवीन लाल कहते हैं कि गांवों में रहने लायक सुविधा तो सरकार को देनी चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही अन्य मूलभूत सुविधाएं देने से पलायन रुक सकता है। इस दिशा में काम होता नहीं दिखता।