अमर उजाला ब्यूरो
मस्मोली से चलमोड़ी तक दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करने के बाद लोक निर्माण विभाग ने उस तरफ झांककर भी नहीं देखा। अब यह सड़क लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई है। सड़क के किनारे नालियों का निर्माण न होने से बारिश के समय सारा पानी खेतों में पट रहा है। सड़क पर डामर नहीं किया गया है। लोग मजबूरी में इसी कच्ची सड़क से जानजोखिम में डालकर सफर करते हैं।
शासन ने मस्मोली से चलमोड़ी तक 2014 में दो किलोमीटर सड़क की मंजूरी दी। लोनिवि ने इतनी सड़क का निर्माण भी दो किश्तों में किया। 2014 में सिर्फ एक किलोमीटर सड़क बनाई गई। जब लोगों ने आवाज उठाई तो वर्ष 2016 में एक किलोमीटर सड़क और खोद दी। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में कितनी मनमानी की जाती है, यह इस सड़क को देखने से पता चल जाता है। सड़क के किनारे घास उग आई है। कभी भी सड़क की देखरेख के लिए कोई मजदूर नहीं भेजा गया। खतरनाक हालत में पहुंच चुकी इस सड़क पर सफर करने से भी लोग डरते हैं।
उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी का कहना है कि सड़क पर डामर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। डामर की मंजूरी मिलते ही नालियों का निर्माण किया जाएगा और टूटी हुई दीवारों को दुबारा बनाया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क को जल्दी दुरुस्त नहीं किया गया तो आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे।