इस तरह टूट गई बलतड़ी जाने वाली सड़क
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महाकाली के किनारे बसे बलतड़ी गांव के लोग एक महीने से दो किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने गांव पहुंच रहे हैं। एक महीने पहले गौरीाहाट के पास दौली गांव में बादल फटने से वहां का सारा मलबा महाकाली नदी के किनारे के गांव बलतड़ी तक पहुंच गया था। मलबे से गांव को जोड़ने वाली सड़क के साथ ही पेयजल लाइन भी ध्वस्त हो गई थी। लोनिवि ने अब तक यह सड़क नहीं खोली है और जल संस्थान ने पेयजल योजना को भी दुरुस्त नहीं किया।
कानड़ी बैंड से बलतड़ी तक सड़क की लंबाई पांच किलोमीटर है। तीन किलोमीटर बाद एसएसबी की सप्तड़ी चौकी के पास से बलतड़ी तक सड़क पर कई स्थानों पर मलबा पटा है। गांव के लोगों के सामने मुख्य समस्या बीमार लोगों को अस्पताल तक लाने में हो रही है। रास्ता इतना खराब हो चुका है कि पैदल चलने में भी खतरा है।
ग्राम प्रधान गोपी राम ने बताया कि लोनिवि की जेसीबी रोज आती है, लेकिन सड़क का मलबा साफ किए बिना वापस लौट जाती है। विभाग के अधिकारी मलबा भरने के लिए टिप्पर के आने के बाद ही सड़क के मलबे को हटाने की बात कहते हैं। साथ ही मसानीगांड़ पेयजल योजना (इससे बलतड़ी और तड़ीगांव सहित कई गांव को पानी मिलता है) टूटने से इन गांवों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
उधर, गांव में हुई बैठक में गांव वालों ने विभागीय कार्यप्रणाली के प्रति रोष जताया। कहा कि तीन दिन बाद जिला मुख्यालय आकर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान उप प्रधान लक्ष्मण चंद, युवक मंगल दल अध्यक्ष सुरेश भट्ट, किशन चंद, राजेंद्र भंडारी, लाल सिंह, खीम भट्ट, राम सिंह, कैलाश भट्ट, नवीन भंडारी, राम सिंह आदि मौजूद थे।